इलाके में ‘पंडितजी’ के नाम मशहूर विकास दुबे, 17 साल की उम्र में की थी पहली हत्या; एक पैर में पड़ी है रॉड, 500 कदम पैदल चलना मुश्किल


  • शिबली न्याय पंचायत के रहने वाले लल्लन बाजपेयी से विकास दुबे की 22 साल पुरानी दुश्मनी
  • विकास ने बाजपेयी पर साल 2002 में कराई थी बम व गोलियों से हमला, तीन के उड़ गए थे चीथड़े
  • विवादित जमीनों पर कब्जा करवाना, फैक्ट्रियों से अवैध वसूली करना था मुख्य काम, युवाओं को बना रखी है फौज

दैनिक भास्कर

Jul 03, 2020, 08:15 PM IST

कानपुर के बिकरु गांव से रिपोर्ट (रवि श्रीवास्तव). कानपुर देहात के बिकरु गांव में गुरुवार रात करीब एक बजे हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे को पकड़ने गई पुलिस टीम पर अंधाधुंध फायरिंग की गई। जिसमें डीएसपी बिल्हौर समेत आठ पुलिसकर्मी की जान चली गई। बदमाश विकास दुबे फरार है। पुलिस ने मुठभेड़ में उसके मामा प्रेमप्रकाश व एक रिश्तेदार अतुल को एनकाउंटर में ढेर कर दिया है। विकास ने महज 17 साल में पहली हत्या की थी। एक मामले में सहारनपुर में उस पर हमला हुआ था। जिसके बाद उसके पैर में रॉड पड़ी है। वह 500 कदम भी पैदल नहीं चल सकता है। विकास का गांव में इतना दबदबा है कि महिलाएं और पुरुष उसके खिलाफ कुछ भी नहीं बोलते हैं। वह अपने गांव में पंडित जी के नाम से मशहूर है। लेकिन उसके कई दुश्मन भी हैं। उनमें से एक लल्लन बाजपेई भी हैं।

18 साल पहले लल्लन पर हुआ था जानलेवा हमला, यहीं से हुई दुश्मनी

हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के बिकरु गांव से लगभग 3 किमी दूर शिबली एक छोटा सा कस्बा पड़ता है। इस न्याय पंचायत के लल्लन बाजपेयी 1995 से 2017 तक लगातार अध्यक्ष रहे। शिबली थाने से महज 1 किमी दूर लल्लन बाजपाई का घर है। बाहरी कमरे में अकेले बैठे लल्लन बाजपाई टीवी पर हत्याकांड की खबरे देख रहे थे। हमारी उनसे मुलाकात हुई ही थी कि उनसे मिलने के लिए एसटीएफ की टीम पहुंच गई। उनकी बन्द कमरे में बातचीत हुई। आधे घंटे बाद लल्लन बाजपाई फिर हमसे मुखातिब हुए। लल्लन बाजपाई कहते हैं कि 1995 में जब मैंने अपना अध्यक्षी का कार्यकाल पूरा किया तो फिर दोबारा चुनाव की तैयारी शुरू की। लेकिन विकास ने मुझ पर हमला करवाया। वह चाहता था कि मुझे मारकर वह अपने किसी आदमी को अध्यक्ष पद के लिए चुनाव में खड़ा करवा दे। हमारी दुश्मनी तब से शुरू हुई, जब उसने मेरी न्याय पंचायत में लोगों को धमकाना, डराना और वसूली करना शुरू किया। मैंने उसे मना किया तो उसने मुझसे दुश्मनी कर ली।

अपने घर के भीतर बैठे लल्लन बाजपेयी। (सफारी शूट में-बाएं)

11 लोगों ने बम और गोली से किया था हमला, दीवारों पर चिपके पड़े थे मांस के लोथड़े

लल्लन बाजपई बताते हैं कि 2002 में चुनाव से पहले घर पर चौपाल लगा करती थी। तकरीबन 7 बजे का समय था, हम पांच लोग बैठे हुए थे। अचानक से घर के बगल रास्ते से और सामने से कुछ लोग मोटर साइकिल से आए और बम मारना शुरू कर दिया। साथ ही साथ फायरिंग करनी शुरू कर दी। मैं दरवाजे की चौखट पर ही था। मैं अंदर भागा। मेरे साथ एक लड़का और भागा। लेकिन दरवाजे पर बैठे 3 लोगों की मौत हो गयी। जब हल्ला मचा तो हमलावर भाग निकले। मेरे शरीर पर कई छर्रे लगे हुए थे। जब सब शांत हुआ तो मैं नीचे आया तो दीवारों पर मांस के लोथड़े चिपके थे। मृतकों के शरीर का ऊपरी हिस्सा गायब ही हो गया था। मेरा कान कई महीनों तक खराब रहा। अभी भी मैं ऊंचा सुनता हूं। मरने वालों में कृष्णा बिहारी मिश्र, कौशल किशोर और गुलाटी थे। तब से 22 साल हो गए हमारी और विकास के बीच दुश्मनी चल रही है।

लल्लन बाजपेई का घर।

17 साल की उम्र में की पहली हत्या, फिर बढ़ता गया अपराध का ग्राफ

लल्लन बताते हैं कि, 1985 से 90 का दौर था, जब विकास दुबे उर्फ पंडितजी 17 साल उम्र का रहा होगा, उसने कानपुर-कन्नौज बॉर्डर पर पड़ने वाले गंगवापुर वहां पहली हत्या की थी। यह गांव विकास का ननिहाल है। इस हत्याकांड में उसे कोई सजा नहीं हुई। जिसके बाद वह मनबढ़ हो गया। उसके बाद वह छोटी मोटी चोरियों को अंजाम देता रहा। लूटपाट करता रहा। 1991 में उसने अपने ही गांव के झुन्ना बाबा की हत्या कर दी। इस हत्या का मकसद था बाबा की जमीन कब्जा करना। पुराने समय के लोग जमीन में जेवर वगैरह रखते थे। विकास को यह बात मालूम थी। जिसके चलते उनकी हत्या कर उनकी जमीन पर कब्जा कर लिया। यहां से विकास का मन और बढ़ गया। उसने कॉन्ट्रैक्ट किलिंग वगैरह शुरू कर दी। उसने फिर 1993 में रामबाबू हत्याकांड को अंजाम दिया। फिर 2000 में सिद्धेश्वर पांडेय हत्याकांड को अंजाम दिया। 2001 में राज्यमंत्री संतोष शुक्ला की थाने में गोली मारकर हत्या कर दी।

बदमाश विकास के गांव बिकरु में पीएसी लगाई गई है।

हथियारों का शौकीन, जमीनों पर कब्जा करवाना फैक्ट्रियों से रंगदारी वसूलता है

लल्लन बताते हैं कि लगातार हत्याएं लूट डकैती करने के बाद से उसका इलाके में अच्छा खासा दबदबा बन गया था। इसी के दम पर वह विवादित जमीनों की दलाली करने लगा। साथ ही साथ आसपास की फैक्ट्रियों से पैसे वसूलने लगा। जितनी बड़ी फैक्ट्री उतना बड़ा पैसा वसूली करता था। विकास हथियारों का शौकीन है। अवैध असलहे तो उसके घर में कईयों के पास होंगे। जब उसका गाड़ियों का काफिला निकलता था तो उसके साथ दस से पंद्रह लड़के रहते थे जो अलग अलग हथियारों से लैस रहते थे।

बिकरू गांव में पुलिस और बदमाशों के बीच हुई मुठभेड़ में गोली के निशान।

एक पैर में पड़ी थी रॉड, 500 मीटर भी पैदल नहीं चल सकता

लल्लन बाजपई बताते हैं कुछ सालों पहले उसने अपने दबदबे का इस्तेमाल करने के लिए पश्चिमी यूपी का रुख किया। सहारनपुर में किसी विवादित जमीन की दलाली खाने वहां पहुंचा था, लेकिन सामने वाली पार्टी उस पर भारी पड़ गयी। जहां उसका पैर भी टूट गया था। बाद में उसके पैर में रॉड डाली गई थी। जिसके बाद वह 500 मीटर भी पैदल नही चल सकता है।

यह तस्वीर विकास के गांव बिकरु की है। विकास जिला पंचायत सदस्य भी रहा है। उसके नाम का गांव में लगा शिलापट।

एहसान के बदले तैयार करता था युवाओं की फौज

लल्लन बताते हैं कि विकास हमेशा अपने साथ 20 से 25 लड़कों का जत्था लेकर चलता था। इसमें ज्यादातर गांव के नव युवक हुआ करते थे। जबकि कुछ खास बाहरी होते थे। पिछले 15 सालों से उसके घर में ही प्रधानी रही है तो गांव वालों की जरूरत के मुताबिक सबकी सरकारी योजनाओं से लेकर रूपए पैसे तक की मदद करता था। नए लड़कों को पहले शराब और खाना खिलाना पिलाना करता। फिर उन्हें महंगे कपड़े और मोबाइल वगैरह देता। जब लड़कों को उसकी लत लग जाती तो उन्हें अपने गिरोह में शामिल कर लेता था। गांव में उसकी किसी से दुश्मनी नहीं है न ही किसी को वह परेशान करता है। इसीलिए गांव वाले उसके सपोर्ट में रहते हैं।

यह तस्वीर फरार बदमाश विकास के घर की है। घर के बाहर फोर्स मुस्तैद है।

गांव में विकास के खिलाफ कोई बोलने को तैयार नहीं

गांव में विकास की दबदबे की बात का क्रॉस चेक करने के लिए हमने एक बार फिर बिकरु गांव का रुख किया। लोग उसके खिलाफ बोलने से डरते हैं। विकास के घर से 100 मीटर दूर कुछ महिलाएं आपस में बात कर रही थीं। जैसे ही उनसे विकास के बारें में बात की तो उन्होंने बताया कि गांव में ठाकुर, ब्राह्मण, लोधी, सोनकर लोग रहते हैं। लेकिन गांव में विकास ने किसी को परेशान नहीं किया। राजमती बताती हैं कि विकास 6 दिन पहले ही गांव की एक शादी में शामिल होने आया था। जहां उसने 10 हजार रूपए व्यवहार में दिए थे।

यह तस्वीर बिकरु गांव की है। (बाएं से) राजमती, इंदुमती और रामकुमारी। इन महिलाओं ने कहा- विकास हमारी मदद करता था।

रामकुमारी बताती हैं कि उसने ही मेरी वृद्धा पेंशन लगवाई। घर में शौचालय भी बनवाया है। जबकि इंदुमति कहती है कि घर के मर्दों को काम भी दिलवाता था। कुछ दुख दर्द लेकर पहुंच जाओ तो मदद भी करता था। राजमती बताती है कि विकास का गांव में इतना दबदबा है कि गांव की महिलाएं उनके सामने घूंघट नहीं उठाती हैं।

हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे उर्फ पंडित जी। यह फरार है। पुलिस टीम इसकी तलाश में जुटी हुई है। इसके दो रिश्तेदारों का पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया है।



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