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एस्टेट अफसर सुशांत भाटिया समेत निगम के 4 अधिकारी जौड़ा फाटक रेल हादसे के गुनहगार, ड्यूटी में लापरवाही न बरतते तो बच सकती थी 58 जानें

  • 20 महीने पुराने जौड़ा फाटक रेल हादसे की न्यायिक जांच पूरी
  • रिटायर्ड सेशन जज अमरजीत सिंह कटारी ने सौंपी रिपोर्ट
  • कमिश्नर के पीए को भी मुख्य दोषियों की कतार में खड़ा करने को कहा

दैनिक भास्कर

Jul 04, 2020, 06:40 AM IST

अमृतसर. दशहरे वाले दिन 19 अक्टूबर 2018 को जौड़ा फाटक के पास हुए रेल हादसे की जांच के लिए गठित न्यायिक कमीशन ने अपनी रिपोर्ट सूबा सरकार को सौंप दी है।

रिटायर्ड सेशन जज अमरजीत सिंह कटारी ने अपनी रिपोर्ट में इस हादसे के लिए अमृतसर नगर निगम के 4 अफसरों को दोषी ठहराया है।

इनमें निगम के एस्टेट अफसर सुशांत भाटिया, विज्ञापन विभाग के सुपरिंटेंडेंट पुष्पिंदर सिंह व रिटायर्ड सुपरिंटेंडेंट गिरीश कुमार और लैंड विभाग के रिटायर्ड इंस्पेक्टर केवल कृष्ण शामिल हैं।

कमीशन ने नगर निगम कमिश्नर के पीए सुपरिंटेंडेंट अनिल अरोड़ा को दोषी करार तो नहीं दिया मगर रिपोर्ट में लिखा कि पहली नजर में अरोड़ा को इस मामले के मुख्य दोषियों की कतार में खड़ा कर लाल स्याही से उसकी निशानदेही करनी बनती थी जो कि अब करनी चाहिए।

रिटायर्ड सेशन जज अमरजीत सिंह कटारी ने अपनी रिपोर्ट में वार्ड-29 की पार्षद और मिट्‌टू मदान की मां विजय मदान की गवाही को झूठ का पुलिंदा बताया है।

इस हादसे में 58 से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी जबकि 70 से ज्यादा जख्मी हुए थे। हादसे के 20 महीने बाद आई रिपोर्ट ने एक्सीडेंट में जान गवांने वालों के परिवारों के जख्म फिर हरे कर दिए हैं।

इस रिपोर्ट से साफ हो गया कि अगर निगम के अधिकारी ड्यूटी में लापरवाही न बरतते तो हादसे को रोका जा सकता था।

गौरतलब है कि ज्यूडिशियल कमीशन से पहले जालंधर के डिवीजनल कमिश्नर बी. पुरुषार्था  ने हादसे की मजिस्ट्रियल जांच की थी जिसमें नगर निगम, पंजाब पुलिस और रेलवे के कुछ कर्मचारी लापरवाही बरतने के दोषी पाए गए थे।

ज्यूडिशियल कमीशन की जांच रिपोर्ट में किस दोषी के लिए क्या कहा गया

सुशांत भाटिया, एस्टेट अफसर

जांच रिपोर्ट के अनुसार, कमीशन को दिए अपने बयान में सुशांत भाटिया ने कहा कि धोबीघाट में दशहरा आयोजन के लिए नगर निगम से कोई मंजूरी नहीं ली गई थी।

उन्हें न तो नगर निगम ने इस बारे में बताया और न ही कहीं दूसरी जगह से पता चला कि जौड़ा फाटक के पास दशहरा हो रहा है। इसलिए उसे समागम के आयोजन का पता नहीं था।

इसके अलावा उन दिनों में तीन छुट्टियां थी और शहर में बहुत सारी जगह दशहरे के आयोजन हो रहे थे। इन्हीं सब के चलते उसके लिए धोबीघाट के आयोजन को रोकना संभव नहीं था।

रिपोर्ट के अनुसार कमीशन ने भाटिया की सफाई में कोई दम नहीं मानते हुए उसे दोषी बताया।

केवल कृष्ण, रिटायर्ड इंस्पेक्टर

नगर निगम के रिटायर्ड लैंड इंस्पेक्टर केवल कृष्ण को भी सुशांत भाटिया की तर्ज पर ही दोषी ठहराया गया। रिपोर्ट के अनुसार, केवल कृष्ण ने बिना अनुमति हो रहे दशहरा आयोजन को न रोककर ड्यूटी में लापरवाही बरती।

पुष्पिंदर सिंह, सुपरिंटेंडेंट,

नगर निगम के विज्ञापन विभाग के सुपरिंटेंडेंट पुष्पिंदर सिंह और इसी विभाग के रिटायर्ड सुपरिंटेंडेंट गिरीश कुमार ने अपने बयान में कहा कि दशहरा आयोजन के इश्तिहार निजी इमारतों पर लगे थे इसलिए उन्हें हटाना नहीं बनता था।

चूंकि ये इश्तिहार पब्लिक मीटिंग के संबंध में थे इसलिए पंजाब म्युनिसिपल कारपोरेशन एक्ट-1976 की धारा 123 की उपधारा 11-ए के तहत ऐसे इश्तिहार की फीस लेना भी नहीं बनता। अपनी रिपोर्ट में रिटायर्ड सेशन

पुष्पिंदर सिंह, सुपरिंटेंडेंट,

जज ने लिखा कि दोनों के तर्क में कोई वजन नहीं है। म्युनिसिपल कारपोरेशन एक्ट के अनुसार इश्तिहार की जगह बेशक प्राइवेट इमारत ही क्यों न हो और वह इश्तिहार पब्लिक मीटिंग करने से जुड़ा क्यों न हो, निगम से उसकी मंजूरी लेना अनिवार्य है।

इस केस में पुष्पिंदर सिंह और गिरीश कुमार को इश्तिहार उतरवाकर उन्हें लगाने वाले के खिलाफ कार्रवाई की तजवीज भेजनी थी मगर दोनों ने ऐसा नहीं किया।

पीए अनिल कुमार ने कमिश्नर के टेबल पर पत्र रखा, बताया नहीं

ज्यूडिशियल कमीशन ने रिपोर्ट में लिखा कि नगर निगम कमिश्नर के पीए अनिल अरोड़ा को पता लग गया था कि धोबीघाट के दशहरे की मंजूरी नहीं है। अरोड़ा को यह बात तुरंत कमिश्नर या संबंधित अधिकारी के ध्यान में लानी चाहिए थी।

इस समागम में तत्कालीन विभागीय मंत्री और उनकी पत्नी ने भी शामिल होना था। यदि अरोड़ा अफसरों को यह बात बताते तो मंत्री से कार्यक्रम में न जाने की अपील की जा सकती थी मगर अरोड़ा ने दशहरा कमेटी का पत्र कमिश्नर की टेबल पर रख दिया।

कमिश्नर ने 22 दिसंबर को दफ्तर आकर ये पत्र देखा जबकि दशहरा 19 अक्टूबर 2018 को मनाया जा चुका था।

एडिश्नल डिवीजनल फायर ऑफिसर कश्मीर सिंह दोषमुक्त

कमीशन ने निगम के रिटायर्ड एडिश्नल डिवीजनल फायर ऑफिसर (एडीएफओ) कश्मीर सिंह को दोषमुक्त करार दिया।

इससे पहले बी. पुरुषार्था ने कश्मीर सिंह को दोषी ठहराते हुए कहा था कि उन्होंने उच्चाधिकारियों की मंजूरी के बगैर फायर टेंडर भेजा।

अब ज्यूडिशियल कमीशन की रिपोर्ट में कहा गया है कि फायर ब्रिगेड की तरफ से फायर काॅल्स में वीआईपी ड्यूटी की काॅल दर्ज है।

बतौर सीनियर अधिकारी एडीएफओ को निगम हद में कहीं फायर टेंडर भेजने के लिए किसी से इजाजत लेना जरूरी नहीं है। विभाग भी कोई ऐसा नियम या हुक्म पेश नहीं कर पाया जिससे साबित हो कि उन्हें इजाजत लेनी चाहिए थी।

रिटायर्ड सेशन जज ने रिपोर्ट में लिखा

पार्षद विजय मदान का बयान झूठ का पुलिंदा, उन्होंने मिट्ठू की मां होने की बात भी नहीं बताई

रिटायर्ड सेशन जज अमरजीत सिंह कटारी ने रिपोर्ट में लिखा कि बतौर गवाह नंबर-1 पेश हुई वार्ड-29 की पार्षद विजय मदान ने ऐसे झूठ बोले जो पार्षद तो क्या, सामान्य नागरिक को भी शोभा नहीं देते।

विजय मदान ने नहीं बताया कि वह इसी केस के गवाह नंबर-2 मिट्ठू मदान की मां है। विजय मदान ने कहा कि वह न तो दशहरा आयोजन कर रही कमेटी के किसी मेंबर को जानती हैं और न उन्हें प्रोग्राम का न्यौता देने आए कमेटी मेंबर का नाम याद है।

विजय मदान ने कमेटी मेंबरों से आयोजन संबंधी जरूरी मंजूरियां देखने का दावा भी किया। रिपोर्ट के अनुसार, कमीशन के कई सवालों पर विजय मदान मौन धारण कर बैठ गईं। ऐसे में उनकी गवाही झूठ के पुलिंदे के अलावा कुछ नहीं है।

अब आगे क्या

नोटिस जारी कर 15 दिन में मांगा जवाब, इंक्रीमेंट रोकना, डिमोशन और डिसमिस करना तक संभव

दोषि निगम अधिकारियों को 30 जून को नोटिस जारी कर 15 दिन में लिखित जवाब लोकल बॉडीज महकमे में सब्मिट करने को कहा गया है।

दोषमुक्त करार दिए गए रिटायर्ड एडीएफओ कश्मीर सिंह समेत बाकी अफसरों को निजी सुनाई के लिए 26 अगस्त को महकमे के एडिश्नल चीफ सेक्रेटरी के सामने पेश होना होगा।

नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक रिपोर्ट में दोषी अफसरों को सख्त सजा देने की सिफारिश की गई है। इस सजा में उनका इंक्रीमेंट रोकना, डिमोशन (जिस रैंक पर भर्ती हुआ उससे नीचे नहीं) करना और डिसमिस करना शामिल है।

रावण दहन का आयोजन करने वाली दशहरा कमेटी ईस्ट को लेकर रिपोर्ट में कुछ नहीं

मजिस्ट्रियल और ज्यूडिशियल जांच रिपोर्ट में धोबीघाट में दशहरा मनाने वाली दशहरा कमेटी ईस्ट को लेकर कुछ नहीं कहा गया। सौरभ मदान मिट्ठू की अगुवाई वाली दशहरा कमेटी ईस्ट में कुल 7 पदाधिकारी थे।

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