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ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चों में बढ़ रहा चिड़चिड़ापन, मनोरोग विशेषज्ञों की काउंसलिंग में निकले निष्कर्ष; कई बच्चे होमवर्क तक नहीं समझ पाते

  • सलाह-कमरे को क्लासरूम का रूप देकर शेड्यूल अनुसार करें स्टडी

दैनिक भास्कर

Jun 22, 2020, 08:38 AM IST

रेवाड़ी. कोविड-19 वायरस के फैलाव को देखते हुए पिछले तीन माह से स्कूल बंद है। ऐसे में ऑनलाइन पढ़ाई ही एकमात्र विकल्प बचा है और तीन माह से बच्चे घरों में बैठकर ही ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं। लेकिन लगातार मोबाइल पर ऑनलाइन रहने के कारण बच्चों में अब चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं भी बढ़ने लगी है। बच्चे ऑनलाइन क्लास से उबने लगे हैं। बच्चों में चिड़चिड़ापन के बढ़ते केसेज मनोरोग विशेषज्ञों के पास भी पहुंच रहे हैं।

हर दिन एक-दो बच्चे काउंसलिंग के लिए आ रहे हैं। मनोरोग विशेषज्ञ भी कहते हैं कि रेवाड़ी जैसे छोटे शहर में एक-दो केस भी आने का मतलब है कि यह समस्या ज्यादा है। क्योंकि यहां अभी कोविड को देखते हुए संसाधनों की भी उपलब्धता कम है और डॉक्टर्स भी ओपीडी में ज्यादा समय नहीं दे पा रहे हैं। ऐसे में बच्चों में ऑनलाइन क्लासेज से पैदा हुई यह समस्या ज्यादा है। इधर, बच्चों के साथ ही बड़ों में भी डिप्रेशन, घबराहट, बेचैनी जैसी समस्या बढ़ी है और पुराने पीड़ित भी काफी पहुंचे रहे हैं।

पुराने पीड़ित जिनकी पहले से दवाइयां चल रही थी, अब बीच में किसी कारण से दवाइयां नहीं ले पाए, ऐसे भी पीड़ित पहुंच रहे हैं। उनको सलाह है कि वे दवाइयां बीच में नहीं छोड़े और नियमित दवा का सेवन करते रहें। अपनी दिनचर्या भी संतुलित रखें और रात को समय पर सोएं, जल्दी उठ जाए। देर रात तक नहीं जागे। घर में छोटा-मोटा काम भी करते रहे, ताकि ध्यान बंटा रहे। सोच भी अपनी सकारात्मक रखें।

11वीं की छात्रा बोली- बार-बार होमवर्क के लिए कहा जाता है
नागरिक अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश कुमार बताते हैं कि इस समय बच्चों में ऑनलाइन क्लासेज के चलते चिड़चिड़ापन बढ़ा है। बच्चे ऑनलाइन क्लासेज से बोर होने लगे हैं। उनके पास भी ऐसे हर रोज एक-दो अभिभावक अपने बच्चों को लेकर पहुंच रहे हैं। काउंसलिंग की जाती है तो बच्चा यहीं कहता है कि ऑनलाइन होमवर्क समझ में नहीं आता है। बार-बार गृहकार्य करने के लिए कहा जाता है। ऐसे में अभिभावकों की जिम्मेदारी ज्यादा बढ़ जाती है।

हिदायत- टेक्स्ट बुक में पढ़ें जितना आए उतने हल भी करें
मनोरोग विशेषज्ञ ऐसे मामलों में जब ऑनलाइन पढ़ाई ही एकमात्र विकल्प है तो बच्चों को सलाह भी देते हैं कि वे टेक्स्ट बुक में से पढ़े और जितना आए उतना हल करने की कोशिश करें। कोशिश करे कि घर के एक कमरे को क्लासरूम जैसा बनाए। पढ़ाई का पूरा शेड्यूल भी एक कक्षा के अनुसार ही बनाए। सुबह उठकर स्नान करने के बाद शेड्यूल अनुसार पढ़ाई करे। ऐसा लगना चाहिए कि वे स्कूल में ही बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। नित्य का ऐसा ही शेड्यूल होना चाहिए।

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