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कमर्शियल माइनिंग के खिलाफ तीन दिन की हड़ताल पर मजदूर संगठन

श्रमिक संगठनों के मुताबिक, झारखंड में भी करीब एक लाख 20 हजार से अधिक श्रमिकों ने काम बंद रखा है और राज्य में भी लगभग 225 करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ है। राज्य में अधिकांश खदानें सीसीएल और बीसीसीएल की है।

Edited By Ruchir Shukla | Lipi | Updated:

रवि प्रकाश सिन्हा, रांची

देश में कमर्शियल माइनिंग के खिलाफ मजदूर संगठनों की ओर से गुरुवार को तीन दिवसीय हड़ताल शुरू हो गई। कोयला उद्योग में से तीन दिवसीय हड़ताल शंखनाद करते हुए कोलियरियों में चक्का जाम कर दिया है। जिससे सुबह से ही बीसीसीएल, ईसीएल और सीसीएल के लगभग कोलियरियों में कोयले का उत्पादन और उठाव लगभग बंद है। इस हड़ताल को सफल बनाने के लिए राज्य के सीसीएल, बीसीसीएल और ईसीएल क्षेत्र में मजदूर संगठनों के प्रतिनिधि सुबह से ही सक्रिय हैं।

पांच प्रमुख श्रमिक संगठनों ने बुलाई हड़ताल

पहली पाली के मजदूर अपने-अपने कार्यस्थल पर तो पहुंचे, लेकिन वे सभी बिना हाजिरी बनाए कार्य स्थल पर ही बैठ गए। पांच प्रमुख श्रमिक संगठनों इंटक, एटक, सीटू, एचएमएस और बीएमएस की ओर से बुलाई हड़ताल के दौरान सभी खनन क्षेत्रों में कामगारों ने काम बंद कर सड़क पर उतर कर प्रदर्शन किया। श्रमिक संगठनों की ओर से दावा किया गया है कि हड़ताल से देश भर में करीब 400 करोड़ का कारोबार प्रभावित हो रहा है।

हेमंत सोरेन ने कहा- सिर्फ अनाज देना समाधान नहीं, दूसरे विकल्पों पर भी हो विचाररवि सिन्हा, रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि लॉकडाउन में सिर्फ गरीबों को अनाज दे देना समस्या का समाधान नहीं है और भी विकल्प पर सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में नवंबर महीने तक लोगों को अनाज उपलब्ध कराने का ऐलान किया। यह झारखंड जैसे राज्यों के लिए राहत की घोषणा जरूर है, लेकिन लोगों को इसका कितना फायदा मिलेगा, किस तरह से राज्य के लोग लाभान्वित होंगे, यह देखना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि सभी जरूरतमंद परिवारों को अनाज उपलब्ध कराने का ऐलान जरूर हो जाती है, लेकिन कई बार व्यवहारिक रूप से देखा जाता है कि कुछ जरूरतमंद परिवारों को इसका लाभ नहीं मिल पाता है। वहीं कुछ लोगों को एक नहीं कई अन्य योजनाओं का भी लाभ मिल जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हर निर्धंन और जरूरतमंद परिवारों को अनाज उपलब्ध करा रही है, चाहे वह कोई भी हो, किसी भी राज्य या शहर का हो। हालांकि, लॉकडाउन में बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हुए हैं, नौकरी छूटने से डिप्रेशन में चले गए हैं, तनाव के कारण कई लोगों के खुदकुशी की भी खबर आई है। ऐसे में सिर्फ अनाज दे देना समाधान नहीं है, दूसरे विकल्पों पर भी सोचना चाहिए। कोयला क्षेत्र में हड़ताल की घोषणा के संबंध में मुख्यमंत्री ने बताया कि अभी उन्हें आधिकारिक जानकारी नहीं मिल पाई है, लेकिन उन्होंने कोशिश की है कि जो भी फैसला हो, वह राज्यहित में हो। उन्होंने बताया कि जानकारी मिल रही है और खबर आ रही है कि कोयला खनन कामगार कोयला क्षेत्र का व्यवसायीकरण के खिलाफ हड़ताल पर जाने की तैयारी में है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सभी को अपनी बात रखने का अधिक है।

‘झारखंड में लगभग 225 करोड़ का कारोबार प्रभावित’

श्रमिक संगठनों के मुताबिक, झारखंड में भी करीब एक लाख 20 हजार से अधिक श्रमिकों ने काम बंद रखा है और राज्य में भी लगभग 225 करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ है। राज्य में अधिकांश खदानें सीसीएल और बीसीसीएल की है, जो धनबाद, बोकारो, गिरिडीह, रामगढ़ और चतरा जिले में अवस्थित है। ट्रेड यूनियनों का कहना है कि सरकार कोयला उद्योग को पुराने स्थिति में पहुंचाना चाहती है, यह मजदूरों के हित में नहीं है। जब तक सरकार कमर्शियल माइनिंग की नीति वापस नहीं लेती, तब तक हड़ताल वापस नहीं होगी।

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रांची समेत कई जिलों प्रदर्शन

राजधानी रांची में भी सीसीएल और सीएमपीडीआई मुख्यालय के बाहर श्रमिक संगठन के प्रतिनिधियों ने प्रदर्शन किया। देश की कोयला राजधानी धनबाद में भी हड़ताल का खासा असर देखा गया। सुबह की पाली में मजदूरों ने हाजरी नहीं बनाई। सुबह 8 बजे मजदूर कोलियरी खदान और परियोजना स्थल पर जरूर पहुंचे, लेकिन किसी ने भी हाजरी नहीं बनाई।

जिले के गोविंदपुर क्षेत्र के एकीकृत ब्लॉक फॉर गोविंदपुर, न्यू आकशकिनारी, जोगिडीह के अलावा कतरास क्षेत्र के रामकनाली, केशलपुर, चैतूडीह, एकेडब्लूएमसी सहित अन्य कोलियरियों में काम पूरी तरह से ठप रहा। संयुक्त मोर्चा के हड़ताल को ले मजदूर संगठनों ने गिरीडीह के सीसीएल माइंस और दूसरी जगहों पर विरोध प्रदर्शन किए। बोकारो, चतरा, गिरिडीह समेत अन्य जिलों में भी हड़ताल का व्यापक असर देखा जा रहा है।

Web Title coal workers strike three day against commercial mining jharkhand(Hindi News from Navbharat Times , TIL Network)

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