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कमर और पीठ दर्द के लिए जरूर करें मार्जरी आसन, चुटकियों में दर्द होगा दूर


कोरोना (Corona) महामारी के समय घर पर बैठे लोगों के लिए शरीर को फिट (Fit) और हेल्दी (Healthy) रखना बहुत जरूरी है. खासकर उन लोगों को जो घंटो घर से वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं. उनके लिए योग (Yoga) का अभ्यास करना बहुत जरूरी है. दिनभर में कम से कम एक घंटा योग पर जरूर दें. इन अभ्यासों को करने से न केवल मनुष्य स्वस्थ (Healthy) रह सकता है बल्कि उसे हर प्रकार के तनाव (Stress) से भी मुक्ति मिलती है. योग एक कला है और इसका अभ्यास धीरे-धीरे करना चाहिए. अभ्यास करते हुए ही यह एक आदत के रूप में उभर कर आएगा. वर्क फ्रॉम होम करने वालों को इन दिनों अक्सर कमर, पीठ और कंधे में दर्द की शिकायत हो रही है. ऐसे में फेसबुक के इस लाइव सेशन में कुछ ऐसे योगासन बताए जाएंगे जिनकी मदद से कमर, पीठ और कंधे का दर्द चुटकियों में गायब होगा.

दंडासन
दंडासन एक संस्कृत का शब्द है जो दो शब्दों से मिलकर बना है, जिसमें पहला शब्द डंडा का अर्थ छड़ी या स्टिक है और दूसरा शब्द आसन का अर्थ पोज या मुद्रा है. इसे अंग्रेजी में स्टाफ पोज (Staff Pose) के नाम से भी जाना जाता है. दंडासन एक ऐसा अभ्यास है जो शरीर को उन्नत आसन करने के लिए तैयार करता है. यह शरीर को पूरी तरह से संरेखित करने के लिए क्षमता को भी बढ़ाता है. दंडासन, योग मुद्रा का एक सरल आसन है. यह आत्म-जागृति की ऊर्जा के लिए मार्ग बनाता है. इसलिए दंडासन को शक्ति और अच्छे रूप को बढ़ावा देने के लिए आदर्श आसन माना जाता है, जो किसी की आध्यात्मिक यात्रा का समर्थन करता है.

दंडासन करने के फायदेकंधों में खिंचाव के लिए लाभदायक

रीढ़ की हड्डी को लचीला और मजबूत बनाने के लिए
मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए
सायटिका दर्द में लाभकारी
मस्तिष्क को शांत करता है
पाचन शक्ति को बढ़ाता है

तितली आसन
तितली आसन करने के लिए अपने दोनों पैरों को सामने की ओर सीधा कर के बैठ जाएं. रीढ़ की हड्डी सीधी रखें. अब पैरों को मोड़कर हाथों की उंगलियों को पैरों के पंजों के ऊपर लाकर आपस में मिला दें. इस दौरान आपकी एडियां शरीर से सटी हुई होनी चाहिए. सामान्‍य रूप से सांस लेते हुए दोनों पैरों को एक साथ ऊपर ले जाएं और फिर नीचे लाएं. आपको ऐसा 15 से 20 बार करना है.

मार्जरी आसन
मार्जरी आसन को अंग्रेजी में कैट पोज (Cat pose) के नाम से बुलाया जाता है. इसे कैट खिंचाव मुद्रा के रूप में भी जाना जाता है. इस आसन को करने से रीढ़ और पीठ की मांसपेशियों का लचीलापन बना रहता है. मार्जरी आसन एक आगे की ओर झुकने और पीछे मुड़ने वाला योग आसन है. कैट वॉक दुनिया भर में प्रसिद्ध है, लेकिन हम योग आसन वर्ग में कैट पोज के बारे में चर्चा करते हैं. यह आसन आपके शरीर के लिए अनके प्रकार से लाभदायक है. यह आसन रीढ़ की हड्डी को एक अच्छा खिंचाव देता है. इसके साथ यह पीठ दर्द और गर्दन दर्द में राहत दिलाता है.

मार्जरी आसन के फायदे
रीढ़ की हड्डी को अधिक लचीला बनने में मदद करता है
पाचन क्रिया में सुधार करने में मदद करती है
रक्त परिसंचरण में सुधार करती है
पेट से अनावश्यक वसा को कम करने में मदद करता है
पेट को टोन करने में मदद करता है
तनाव को दूर करने में बहुत मदद करता है
मन को शांत करके मानसिक शांति प्रदान करता है
कंधे और कलाई दोनों को मजबूत बनाता है

ग्रीवा शक्ति आसन
इस योग क्रिया को करने के लिए अपनी जगह पर खड़े हो जाएं. जो लोग खड़े होकर इस क्रिया को करने में असमर्थ हैं वे इसे बैठकर भी कर सकते हैं. जो जमीन पर नहीं बैठ सकते वे कुर्सी पर बैठकर भी इसका अभ्यास कर सकते हैं. कंफर्टेबल पोजीशन में खड़े होकर हाथों को कमर पर टिकाएं. शरीर को ढीला रखें. कंधों को पूरी तरह से रिलैक्स रखें. सांस छोड़ते हुए गर्दन को आगे की ओर लेकर आएं. चिन को लॉक करने की कोशिश करें. जिन लोगों को सर्वाइकल या गर्दन में दर्द की समस्या हो वह गर्दन को ढीला छोड़ें चिन लॉक न करें. इसके बाद सांस भरते हुए गर्दन को पीछे की ओर लेकर जाएं.

सांस छोड़ते हुए फिर गर्दन को आगे की ओर लेकर जाएं. इसके बाद शरीर को पूरी तरह से ढीला छोड़ दें. इस क्रिया को 8 से 10 बार करें. इसके बाद दूसरी क्रिया करनी है. सांस छोड़ते हुए दाईं ओर गर्दन को झुकाएं. सांस भरते हुए सेंटर में गर्दन लेकर आएं. फिर सांस छोड़ते हुए बाईं ओर गर्दन लेकर जाएं और सांस भरते हुए सेंटर में गर्दन ले आएं. इसके बाद शरीर को ढीला छोड़ दें. गदर्न के दर्द को कम करने, शरीर और माइंड को रिलैक्स करने के लिए ये क्रिया बेस्ट है.

इसे भी पढ़ेंः योग के लिए सबसे जरूरी स्ट्रेचिंग, इन आसनों की मदद से बॉडी में लाएं लचीलापन

मर्कट आसन
मर्कट का अर्थ बंदर होता है, इसलिए इस आसन को बंदर आसन भी कहा जाता है. ये आसन करते समय शरीर का आकार बंदर जैसा हो जाता है. यह आसन कमर दर्द और पेट की चर्बी घटाने के लिए काफी लाभकारी होता है. इसे करने से शरीर का लचीलापन बढ़ता है, हाथ-पैरों और कमर का दर्द और मोटापा कम होता है.

ऐसे करें अभ्यास
पहले पीठ के बल लेटकर दोनों हाथों को कमर से नीचे रखें. दोनों पैरों को जोड़कर घुटनों से मोड़ लें. अब कमर से नीचे के हिस्से को ट्विस्ट करते हुए पैरों को एक बार दाईं तरफ बगल में जमीन पर टिका दें. इस अवस्था में सिर को उसकी उलटी दिशा में रखते हैं. इस आसन को 10 से 20 सेकंड से शुरू करते हुए टाइमिंग बढ़ानी है. जमीन पर सीधे लेट जाएं. दोनों पैरों के बीच फासला रखें और और उन्हें घुटनों से मोड़ लें. अब बायां घुटना बगल में जमीन पर टिका दें और दायां घुटना बायें पैर के अंगूठे पर रख दें. इस अवस्था में सिर को विपरीत दिशा में घुमाकर रखें. जमीन पर सीधे लेट जाएं. दाहिने पैर को कमर से सीधा उठाते हुए बायीं तरफ जहां तक हो सके लेकर जाएं. इसे करने की आदर्श स्थिति में दाहिने पैर से बायें हाथ को जमीन पर रखते हुए छूना है. इसी तरह दूसरे पैर से भी करना है. इस आसन को करते समय गर्दन विपरीत दिशा में रखनी है.

मर्कट आसन के फायदे
मर्कट आसन करने से पीठ के दर्द में राहत मिलती है और रीड की हड्डियों का रोग दूर होता है. सर्वाइकल, पेट दर्द, गैस, कमर दर्द, अपाचन, कूल्हों के दर्द, अनिद्रा थकान में मर्कट आसन बहुत ही लाभदायक है. इसके साथ ही मर्कट आसन करने से किडनी, अग्नाशय और लीवर सक्रिय हो जाते हैं.

अश्विनी मुद्रा
जैसे अश्व (घोड़ा) लीध करने के बाद अपने गुदाद्वार को बार-बार सिकोड़ता ढीला करता है, उसी प्रकार गुदाद्वार को सिकोड़ना और फैलाने की क्रिया को ही अश्विनी मुद्रा कहते हैं. घोड़े में इतनी शक्ति और फुर्ती का रहस्य यही मुद्रा है. इसलिए इंजन की ताकत अश्व शक्ति (हॉर्स पावर) से मापी जाती है. यह ऐंटी ग्रेविटी अभ्यास है. इससे शरीर को चलाने वाली ऊर्जा बढ़ती है. सभी अंगों को बल मिलता है, शरीर की ताकत बढ़ती है, हृदय को बल देने वाली यह क्रिया हर्निया, मूत्र दोष, गुदा सम्बन्धी रोग, बवासीर, कब्ज व स्त्री रोगों में बड़ी उपयोगी है. इसके अभ्यास से मूलाधार चक्र में स्थित कुण्डलिनी शक्ति जागने लगती है और लोगों को लम्बे समय तक युवा बनाए रखती है.

हलासन
हलासन को अंग्रेजी भाषा में Halasana और Plow Pose भी कहा जाता है. अन्य योगासनों की तरह ही हलासन को भी उसका नाम खेती में उपयोग किए जाने वाले एक उपकरण से ही मिला है. हलासन के अभ्यास से शरीर कई ऐसी शक्तियों को वापस सक्रिय करने की शक्ति हासिल कर पाता है.

कैसे करें हलासन
योग मैट पर पीठ के बल लेट जाएं. अपने हाथों को शरीर से सटा लेंच. हथेलियां जमीन की तरफ रहेंगी. सांस भीतर की ओर खींचते हुए पैरों को ऊपर की तरफ उठाएं. टांगे कमर से 90 डिग्री का कोण बनाएंगी. दबाव पेट की मांसपेशियों पर रहेगा. टांगों को ऊपर उठाते हुए अपने हाथों से कमर को सहारा दें. सीधी टांगों को सिर की तरफ झुकाएं और पैरों को सिर के पीछे ले जाएं. पैरों के अंगूठे से जमीन को छुएंगे. हाथों को कमर से हटाकर जमीन पर सीधा रख लें. हथेली नीचे की तरफ रहेगी. कमर जमीन के समानांतर रहेगी. इसी स्थिति में एक मिनट तक बने रहें सांसों पर ध्यान केंद्रित करें सांस छोड़ते हुए, टांगों को वापस जमीन पर ले आएं. आसन को छोड़ते हुए जल्दबाजी न करें. टांगों को एक समान गति से ही सामान्य स्थिति में वापस लेकर आएं.

हलासन के फायदे
पाचन तंत्र के अंगों की मसाज करता है और पाचन सुधारने में मदद करता है
मेटाबॉलिज्म बढ़ाता है और वजन घटाने में मदद करता है
डायबिटीज के मरीजों के लिए ये बेस्ट आसन है क्योंकि ये शुगर लेवल को कंट्रोल करता है
ये रीढ़ की हड्डी में लचीलापन बढ़ाता और कमर दर्द में आराम देता है
ये स्ट्रेस और थकान से निपटने में भी मदद करता है
दिमाग को शांति मिलती है

भुजंगासन
भुजंगासन, सूर्य नमस्कार के 12 आसनों में से 8वां है. भुजंगासन को सर्पासन, कोबरा आसन या सर्प मुद्रा भी कहा जाता है. इस मुद्रा में शरीर सांप की आकृति बनाता है. ये आसन जमीन पर लेटकर और पीठ को मोड़कर किया जाता है जबकि सिर सांप के उठे हुए फन की मुद्रा में होता है.

भुजंगासन के फायदे
रीढ़ की हड्डी में मजबूती और लचीलापन
पेट के निचले हिस्से में मौजूद सभी अंगों के काम करने की क्षमता बढ़ती है
पाचन तंत्र, मूत्र मार्ग की समस्याएं दूर होती हैं और यौन शक्ति बढ़ती है
मेटाबॉलिज्म सुधरता है और वजन कम करने में मदद मिलती है
कमर का निचला हिस्सा मजबूत होता है
फेफड़ों, कंधों, सीने और पेट के निचले हिस्से को अच्छा खिंचाव मिलता है
डिप्रेशन में भी इससे फायदा मिलता है
अस्थमा में भी राहत

पश्चिमोत्तानासन
पश्चिमोत्तानासन योग का नाम दो शब्दों के मेल से बना है- पश्चिम और उत्तान. पश्चिम यानी पश्चिम दिशा या शरीर का पिछला हिस्सा और उत्तान मतलब खिंचा हुआ. रीढ़ की हड्डी के दर्द से निजात पाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को पश्चिमोत्तानासन योग करना चाहिए. इस आसन का अभ्यास करते समय शरीर के पिछले हिस्से यानी रीढ़ की हड्डी में खिंचाव उत्पन्न होता है, इस कारण इस आसन को पश्चिमोत्तानासन कहा जाता है. इस आसन को करने से शरीर का पूरा हिस्सा खिंच जाता है और यह शरीर के लिए बहुत लाभदायक होता है. जिन लोगों को डायबिटीज की समस्या होती है, उनके लिए पश्चिमोत्तानासन रामबाण की तरह काम करता है और इस रोग के लक्षणों को दूर करने में मदद करता है. इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से ग्रसित लोगों के लिए भी यह आसन बहुत फायदेमंद माना जाता है.

पश्चिमोत्तानासन के फायदे
तनाव दूर करने में फायदेमंद
पेट की चर्बी दूर करने में मददगार
हड्डियों को लचीला बनाने में कारगर
बेहतर पाचन के लिए फायदेमंद
अनिद्रा की समस्या को दूर करता है

कपालभाती
कपाल भाति बहुत ऊर्जावान उच्च उदर श्वास व्यायाम है. कपाल अर्थात मस्तिष्क और भाति यानी स्वच्छता अर्थात ‘कपाल भाति’ वह प्राणायाम है जिससे मस्तिष्क स्वच्छ होता है और इस स्थिति में मस्तिष्क की कार्यप्रणाली सुचारु रूप से संचालित होती है. वैसे इस प्राणायाम के अन्य लाभ भी हैं. लीवर किडनी और गैस की समस्या के लिए बहुत लाभ कारी है. कपालभाति प्राणायाम करने के लिए रीढ़ को सीधा रखते हुए किसी भी ध्यानात्मक आसन, सुखासन या फिर कुर्सी पर बैठें. इसके बाद तेजी से नाक के दोनों छिद्रों से सांस को यथासंभव बाहर फेंकें. साथ ही पेट को भी यथासंभव अंदर की ओर संकुचित करें. इसके तुरंत बाद नाक के दोनों छिद्रों से सांस को अंदर खीचतें हैं और पेट को यथासम्भव बाहर आने देते हैं. इस क्रिया को शक्ति व आवश्यकतानुसार 50 बार से धीरे-धीरे बढ़ाते हुए 500 बार तक कर सकते हैं लेकिन एक क्रम में 50 बार से अधिक न करें. क्रम धीरे-धीरे बढ़ाएं. इसे कम से कम 5 मिनट और अधिकतम 30 मिनट तक कर सकते हैं.

कपालभाति के फायदे
ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होता है
सांस संबंधी बीमारियों को दूर करमे में मदद मिलती है. विशेष रूप से अस्थमा के पेशेंट्स को खास लाभ होता है
महिलाओं के लिए बहुत लाभकारी
पेट की चर्बी को कम करता है
पेट संबंधी रोगों और कब्ज की परेशानी दूर होती है
रात को नींद अच्छी आती है





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