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कुरुक्षेत्र था केंद्र, यहां 650 साल बाद दिखेगा ये नजारा; 3 घंटे 26 मिनट 21 सेकेंड रहा सूर्यग्रहण, 37 सेकंड तक बनी रही रिंग ऑफ फायर

  • भौरसैंदा गांव के पास सुबह से ही देश-दुनिया के खगोल वैज्ञानिक इस खास पल को सहेजने के लिए जुटे रहे
  • संतों ने ब्रह्मसरोवर पर विश्व शांति के लिए किया हवन-यज्ञ

दैनिक भास्कर

Jun 22, 2020, 06:50 AM IST

कुरुक्षेत्र. साल 2020 का पहला सूर्यग्रहण रविवार काे भारत समेत दुनिया के कई देशाें में देखा गया। दशक का यह आखिरी सूर्यग्रहण तीन घंटे 26 मिनट 21 सेकेंड तक रहा। 37 सेकंड तक रिंग ऑफ फायर बनी रही। इस वलयाकार सूर्यग्रहण के अद्भुत संयोग का केंद्र धर्म नगरी कुरुक्षेत्र रहा। इसलिए भौरसैंदा गांव के पास सुबह से ही देश-दुनिया के खगोल वैज्ञानिक इस खास पल को सहेजने के लिए जुटे रहे।  इस दौरान संतों ने ब्रह्मसरोवर पर विश्व शांति के लिए हवन-यज्ञ किया।

1:47 के बाद खत्म हुआ ग्रहण
10 बजकर 20 मिनट 35 सेकेंड पर सूर्यग्रहण का स्पर्श शुरू हुआ था। यहां सूर्यग्रहण की अवधि तीन घंटे 26 मिनट 21 सेकेंड रही। 12 बजकर 1 मिनट 28 सेकेंड पर यह चरम पर रहा। विज्ञान प्रसार विभाग की टीम सदस्य अमृतांशु वाजपेयी और कल्पना चावला तारामंडल के एजुकेशन अधिकारी संजीव कुमार के मुताबिक चरम क्षणों में चंद्रमा ने सूर्य को 99.6 प्रतिशत तक ढंक लिया था। देश के कई हिस्साें में बादल हाेने से ग्रहण नहीं दिखा।

ऐसे होता है वलयाकार संयोग
वलयाकार सूर्य ग्रहण में चन्द्रमा पृथ्वी के काफी दूर रहते हुए पृथ्वी और सूर्य के बीच में आ जाता है अर्थात चन्द्र सूर्य को इस प्रकार से ढकता है कि सूर्य का केवल मध्य भाग ही छाया क्षेत्र में आता है और पृथ्वी से देखने पर चन्द्रमा द्वारा सूर्य पूरी तरह ढका दिखाई नहीं देता बल्कि सूर्य के बाहर का क्षेत्र प्रकाशित होने के कारण कंगन या वलय के रूप में चमकता दिखाई देता है। कंगन आकार में बने सूर्यग्रहण को ही वलयाकार सूर्य ग्रहण कहा जाता है।

20 मार्च 2034 काे पूर्ण सूर्यग्रहण हाेगा

  • अगला वलयाकार सूर्यग्रहण भारत में 21 मई 2031 को दिखेगा। 20 मार्च 2034 को पूर्ण सूर्यग्रहण नजर आएगा।
  • सूर्यग्रहण अफ्रीकी देश कांगाे, सूडान, इथाेपिया, यमन, सऊदी अरब, ओमान, पाकिस्तान और चीन में भी देखा गया।
  • मान्यता है कि सूर्यग्रहण पर कुरुक्षेत्र में स्नान व दान से सौ अश्वमेघ यज्ञ के बराबर फल मिलता है।
  • इसरो के वैज्ञानिकों ने आदित्य मिशन के तहत इस खगोलीय घटना का अध्ययन किया।

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