कोरोना के साथ ही मानसून की चुनौती हुई खड़ी… PWD की अफ़सरों को कोविड ड्यूटी से मुक्त करने की मांग


बरसात में लैंडस्लाइड से सड़कें तबाह हो जाने के कारण बहुत से इलाक़ों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है. (file phioto)

विभाग के अधिकतर अफ़सर कोविड डयूटी में तैनात हैं और इसकी वजह से मॉनसून की चुनौतियों से निपटने की तैयारियों में दिक्कतें आ रही हैं.

देहरादून. उत्तराखंड में लोगों के सामने जल्द दोहरी चुनौती खड़ी होने वाली है. कोरोना संक्रमण तो पहले से ही चुनौती है दूसरी चुनौती बनकर आने वाला है मॉनसून काल. पहाड़ी भू-भाग होने के कारण मॉनसून उत्तराखंड पर हमेशा आफ़त बनकर टूटता है. मॉनसून का समय शुरू हो चुका है जो प्रदेश में आपदाओं के लिहाज़ से बेहद संवेदनशील समय होता है. बरसात में लैंडस्लाइड से सड़कें तबाह हो जाने के कारण बहुत से इलाक़ों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है. अब राहत कार्य भी कोरोना वायरस के कारण सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने की शर्त के साथ ही किए जाएंगे, जो आसान नहीं रहेगा.

तैयारी

उत्तराखंड एक ओर तो कोरोना वायरस संक्रमण से जूझ रहा है दूसरी ओर मॉनसून की चुनौती भी इसके सामने आ खड़ी हुई है. धन की कमी आड़े न आए इसके लिए शासन ने लोक निर्माण विभाग को शुरूआती दौर में तीस करोड़ रुपये जारी किए हैं ताकि सड़कें बंद होने की स्थिति में तत्काल खोली जा सकें. लोक निर्माण विभाग भी अलर्ट पर है और विभाग ने कुछ इस तरह अपना रोडमैप तैयार किया है…

  • विभाग ने 13 ज़िलों में 726 मार्ग ऐसे चिन्हित किए हैं, जो बरसात में अक्सर भू-स्खलन होने से बंद हो जाते हैं. इन मार्गो के बंद होने की स्थिति में 267 वैकल्पिक मार्ग तैयार किए गए हैं और यदि वैकल्पिक मार्ग भी बंद हो जाते हैं तो इसके लिए 46 अन्य वैकल्पिक मार्ग तैयार रहेंगे.
  • उत्तराखंड के सभी 13 ज़िलों में क्रोनिक लैंड स्लाइड ज़ोन वाले 74 मार्ग चिन्हित किए गए हैं. इन सड़कों पर 62 हॉट स्पॉट ऐसे हैं जहां चौबीसों घंटे जेसीबी मशीनें तैनात रहेंगी.
  • पहाड़ में अक्सर बाढ़, भू-स्खलन से पुल, पैदल रास्ते धवस्त हो जाते हैं. आपात स्थिति से निपटने के लिए विभाग ने 17 वैली ब्रिज, 24 पैदल ब्रिज और 16 मैनुअल ट्राली का बैकअप रखा है.
  • प्रत्येक डिवीजन में कंट्रोल रूम भी बनाए गए हैं, जो डिस्ट्रिक्ट कंट्रोल रूम के साथ ही स्टेट कंट्रोल रूम के संपर्क में रहेंगे.

चुनौती

लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता स्तर-1 इंजीनियर अयाज़ अहमद का दावा है कि विभाग पूरी तरह अलर्ट पर है, हालांकि विभाग की एक चिंता भी है. विभाग के अधिकतर अफ़सर कोविड डयूटी में तैनात हैं और इसकी वजह से मॉनसून की चुनौतियों से निपटने की तैयारियों में दिक्कतें आ रही हैं. इसलिए विभाग ने अब शासन को पत्र लिखकर लोनिवि अफसरों को कोविड डयूटी से मुक्त करने की मांग की है.

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First published: June 19, 2020, 3:44 PM IST





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