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गर्भवती महिला को अस्पताल लाते ही ऑटो में हुई डिलीवरी, स्ट्रेचर न मिलने के कारण जच्चा-बच्चा वार्ड के बाहर पड़ा रहा नवजात, मौत

  • पिता बोला- अगर अस्पताल लाते ही कोई देख लेता तो शायद बच्चे की जान बच जाती
  • अस्पताल के जच्चा-बच्चा वार्ड के ग्राउंड फ्लोर पर कोई स्ट्रेचर नहीं था

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 07:59 AM IST

जालंधर. (प्रभमीत सिंह)
ऑटो रिक्शा में सात महीने के बच्चे की डिलीवरी होने के बाद सिविल अस्पताल की गायनिक वार्ड के नर्सिंग स्टाफ की तरफ से एक बार फिर लापरवाही सामने आई है। डिलीवरी ऑटो में होने का पता चलने के बाद भी महिला को जच्चा-बच्चा वार्ड के अंदर लेकर जाने के लिए करीब परिवार के सदस्यों को आधे घंटे का समय लग गया। कारण अस्पताल के जच्चा-बच्चा वार्ड के ग्राउंड फ्लोर पर कोई स्ट्रेचर नहीं था। महिला के देवर ने बताया कि जच्चा-बच्चा वार्ड में पहुंचने में उसने स्टाफ नर्स को बताया कि बच्चे की डिलीवरी ऑटो रिक्शा में ही हो गई है और मरीज को वार्ड में लेकर आओ।

आगे से स्टाफ नर्स ने जवाब दिया कि वार्ड के बाहर व्हील चेयर पड़ी है आप महिला को अंदर ले आओ। हालत गंभीर होने के कारण स्ट्रेचर लाना पड़ा। अस्पताल की दर्जा-4 कर्मचारी के साथ जच्चा-बच्चा को ऑटो से उतार कर खुद वार्ड तक लाए। उसके बाद स्टाफ ने बच्चे का नाड़ू काटा और उसे निक्कू वार्ड में शिफ्ट किया। तब तक बच्चे की सांसें थम चुकी थीं। ड्यूटी पर मौजूद डॉ. संजीव का कहना है कि बच्चा ब्रोट डेड ही पैदा हुआ है लेकिन फिर भी बच्चे को फेफड़ों को आर्टिफिशयल ऑक्सीजन देने की कोशिश की गई थी, जिसे बच्चा रिकवर नहीं कर पाया। वहीं सिविल अस्पताल के एमएस डॉ. एचपी सिंह ने बताया कि महिला को वार्ड में ले जाने के लिए इतना समय कैसे लगा, इसकी जांच करवा रहे हैं।

कोई ले न जाए, इसलिए बंद कमरे में रखा है मैटरनिटी वार्ड का स्ट्रेचर

शुक्रवार को जब परिजन जच्चा-बच्चा को वार्ड के बाहर लाए तो मैटरनिटी वार्ड के स्टाफ ने जच्चा को व्हीलचेयर पर अंदर लाने के लिए कहा लेकिन डिलीवरी ऑटो में ही होने के कारण महिला को व्हीलचेयर पर अंदर नहीं लाया जा सकता था। जब परिजनों ने स्ट्रेचर की मांग की तो मैटरनिटी वार्ड में कोई स्ट्रेचर नहीं था। भास्कर ने जब मौके पर जांच की तो पता चला की मैटरनिटी वार्ड की सीनियर स्टाफ नर्स ने वार्ड का स्ट्रेचर कमरे में बंद कर रखा था। दूसरी तरफ मैटरनिटी वार्ड में मौजूद स्टाफ का कहना है कि जब उसे परिजनों ने बताया कि बच्चा अॉटो में ही पैदा हो गया है तो वह तुरंत मरीज को ऑटो में देखने गई थी। जबकि महिला के परिजनों का कहना है कि जब वे वार्ड में गए तो स्टाफ ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया, जिसे स्टाफ नर्स ने मानने से इनकार कर दिया। उधर, हीरा लाल ने बताया कि उसका पहला बच्चा था। अगर अस्पताल में आते ही उसे कोई देख लेता तो शायद उसके बच्चे की जान बच जाती।

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