छत्तीसगढ़ में बीमार बच्ची 5 किमी पैदल चली, नाव से नदी पार की तब अस्पताल पहुंची, रेजिडेंट टिड्दी भगाने का नया जुगाड़।

दैनिक भास्कर

Jul 02, 2020, 07:32 AM IST

नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के ग्राम पंचायत कंदाड़ी के आश्रित ग्राम आलंद की 12 साल की सरकार की बीती रात अचानक तबीयत ज्यादा खराब हो गई। गांव में इलाज की कोई सुविधा नहीं होने के कारण रात भर घर में ही रखना पड़ा। सुबह परिजन 5 किमी पैदल चलने कर बीमारियां को लेकर बेचाघाट पहुंचे। यहां कोटरी नदी को पार करने वाली नाव का इंतजार एक घंटा करना पड़ा। ड्रा आने के बाद परिजन बीमार बच्ची पोलकर छोटेबेठिया उपस्वास्थ्य केंद्र पहुंचे।

आलंदन से छोटेबेठिया की दूरी 6 किमी है लेकिन बीच में कोटरी नदी में से पार करना पड़ता है। नदी पर पुल नहीं है। छोटेबेथिया के अलावा साइराम में भी उपस्वास्थ्य केंद्र है जहां की दूरी आलंदन से 14 किमी है। वहाँ जाने पर भी स्वास्थ्य कार्यकर्ता मिलेंगे या नहीं यह तय नहीं रहता है। इसीलिए आलमंड के ग्रामीण मजबूरी में नाव से नदी पार कर छोटेबेठिया उपस्वास्थ्य केंद्र पहुंचते हैं।

मछली पकड़ने के जालों में फंसने से तीन बटमच्छ टूट चुके हैं

रेज के पाली में स्थित जवाई बांध डूब क्षेत्र में गत शुक्रवार को 3 बटमच्छ व 81 पक्षी मछली पकड़ने के जाल में फंस कर समाप्त हो गए थे। बांध में मछली पकड़ने के व्यर्थ पड़े जालों में फंसी मछलियों और छोटे जीवों को खाने के चक्कर मे फंस जाते हैं ये बेजुबान वन्यजीव और भूख व पानी में डूबने के कारण तड़प-तड़प कर अपनी जान गंवा बैठते हैं। बांधने के क्षेत्र से वन्यजीव विशेषज्ञ कृष्णपाल पारगी ने फोटो उपलब्ध करवाए हैं, जो कुछ महीने पुराने हैं। सम्भवत शुक्रवार को जो मृत मगरमच्छ मिले थे, आशंका है कि यह वही मगरमच्छ हो सकता है, जो फोटो में जा रहा है।

पीपल का पेड़ गिरने से मंदिर और

जयपुर के मालवीय नगर सेक्टर -5 स्थित पीपल धाम मंदिर का यह दृश्य है। 200 साल पुराना भारी भरकम पीपल के पेड़ के तीन टुकड़े बुधवार सुबह अचानक गिर गए। शिव पंचायत वह हनुमानजी की मूर्ति वाले हिस्से पर पेड़ गिरा, जिससे मंदिर के दर्शन हो गए। पार्क में झूले और कार दब गई। जिस समय पेड़ गिरा, न मंदिर में कोई भी ना पार्क में था इसलिए कोई भी कष्ट नहीं हुआ। मधुमक्खियों के छः और के कारण पेड़ को हटाने में टीमों को मशक्कत करनी पड़ी।

टिडिंस का हमला: किसान ने खेत में लगाया लाउड स्पीकर

राजस्थान के झुंझुनूं में टिड्ढियों की आशंका को लेकर किसान ने खेत में लाउड स्पीकर लगाए हैं। कोरोना से परे इस वक्त हमारे किसान एक बड़े संकट से जूझ रहे हैं। टिडिंस के रूप में यह संकट उनके खेतों में दिन-रात मंडरा रहा है और फसलों को चट कर रहा है। पिछले 40 दिन की बात करें तो शेखावाटी में सात बार टिडिंस का हमला हो चुका है। किसान राजेंद्र फौजी ने बताया कि ये कब, कहां और किस दिशा से आ जाएं कुछ पता नहीं हैं। किसानों के पास उन्हें भगाने के लिए केवल एक ही विकल्प है कि शोर मचाया जाए।

बारिश: स्टेशन रोड पर दृश्य बाधित

राजस्थान के चूरू जिले में बुधवार को जमकर बारिश हुई। रतनगढ़ में भी तेज हवा के साथ शाम साढ़े 3 बजे 10 मिनट बारिश हुई। शाम सवा चार बजे फिर बारिश आई। पांच बजे फिर तेज बारिश का दौर शुरू हुआ, जो आधे घंटे चला गया। शाम छह बजे तक 35 एमएम बारिश दर्ज की गई। निचले इलाके जलमग्न हो गए। उत्तरी बाजार में तीन फीट से अधिक पानी भर गया। स्टेशन रोड पर शो बाधित हुआ।

आइसोलेशन वार्ड में काम कर रहे कर्मचारी को फूल दिए गए

चंडीगढ़ में पीयू के केंद्र फॉर सोशल वर्क के एनएसएस वालिंटियर्स ने डॉक्टर्स डे पर जीएमसीएच -16 में जाकर सभी डॉक्टर्स और पैरामेडिकल स्टाफ को फूल दिए। शुभम, जसप्रीत कौर, कबीर सिंह और नरेंद्र सिंह अपने एनएसएस कोऑर्डिनेटर डॉ। गौरव गौड के साथ अस्पताल पहुंचे और आइसोलेशन वार्ड में काम कर रहे स्टाफ को फूल दिए गए।

हवा के साथ बादल बिना बरसे ही आगे चले जाते हैं

चंडीगढ़ और आसपास के दैनिक बादल तो छा रहे हैं, लेकिन बारिश नहीं हो रही है। हवा के साथ बादल बिना बरसे ही आगे चले जाते हैं। बुधवार दोपहर को कौर में टिम्बर ट्राल के पास अचानक से काले बादल छा गए। लगा कि तेज बारिश होगी, लेकिन हुआ कुछ भी नहीं।

काले बादल घिरे, जर्नी में उड़ गए

रेज के बीकानेर में मानसून की अच्छी बारिश का इंतजार एकबार फिर धराशायी हो गया। तेज धूप (अधिकतम तापमान 44.8 डिग्री) से बुरा हाल है। लेकिन, दोपहर बाद काले घने बादल छा गए। बावंडर उठा। दिन में ही अंधेरा छा गया। आधे घंटे तक धूल भरी धूनी से सबकुछ ठहर सा गया। बवंडर थमा तो बादल उड़ चुके थे। उधर, मौसम विभाग ने 2 और 3 जुलाई को बीकानेर में लू चलने की संभावना जताई है।

जून की बारिश ने पिछले चार साल का रिकॉर्ड तोड़ा

फोटो मध्यप्रदेश केजैन की है। यहां के त्रिवेणी स्टाप डेम पर शिप्रा नदी ओवरफ्लो चल रही है। बुधवार को डेम के पानी के बीच मछलियों के शिकार के लिए बगुले भी आ गए।

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