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ढिलवां रोड पर पैचवर्क न होने के विरोध में 2 घंटे दिया धरना, ढिलवां-तल्हण रोड पर दो घंटे ट्रैफिक रहा बाधित

  • अब सेंट्रल हलके के तीन कांग्रेसी पार्षद अपनी ही सरकार के खिलाफ उतरे

दैनिक भास्कर

Jul 03, 2020, 05:39 AM IST

जालंधर. सूबे से लेकर नगर निगम में कांग्रेस की सत्ता होने के बावजूद कांग्रेस पार्षदों और वर्करों का असंतोष बढ़ता जा रहा है। पहले कैंट हलका, फिर वेस्ट और अब सेंट्रल हलका के 3 कांग्रेसी पार्षदों ने सड़क पर पैचवर्क न होने को लेकर अपनी सरकार के खिलाफ धरना लगाया।

नाराज पार्षदों की मांग थी कि पीडब्ल्यूडी ने एस्टीमेट बनाने के बाद भी ढिलवां से तल्हण जाती रोड पर पैचवर्क नहीं कराया। इसी को लेकर वार्ड नंबर 10 के कांग्रेस पार्षद मंदीप जस्सल ने पहले चेतावनी दी और सड़क का काम शुरू न होने पर वीरवार सुबह ढिलवां रोड चौक पर धरना दिया। सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक दिए गए धरने में वार्ड 8 के कांग्रेसी पार्षद शमशेर सिंह खैहरा और वार्ड 13 के पार्षद पति विजय दकोहा भी शामिल रहे।

बाद में मौके पर पीडब्ल्यूडी इंजीनियरों के साथ पहुंचे एसडीएम-1 जयइंदर सिंह ने कहा कि शुक्रवार से सड़क पर पैचवर्क और एक माह में एस्टीमेट बनाकर नई सड़क का काम शुरू हो जाएगा, तब जाकर धरना खतम हुआ। धरने की अगुआई कर रहे पार्षद मंदीप जस्सल ने पीडब्ल्यूडी मुर्दाबाद के नारे लगाए, कहा कि ढिलवां रोड पर बने गड्‌ढे में कई लोग गिरकर धायल हो चुके हैं, लेकिन इसके पैचवर्क का एस्टीमेट बनने के चार माह बाद भी सड़क ठीक नहीं किया गया। इस कारण धरना लगाने को मजबूर होना पड़ा। इस दौरान दो घंटे तक ढिलवां-तल्हण रोड पर ट्रैफिक बाधित रहा।

दकोहा बोले- वर्करों की सुनवाई नहीं, अफसरों को बदलो

पार्षद पति विजय दकोहा ने कहा कि कांग्रेस सरकार के राज में उनके ही वर्कर और पार्षदों की कोई सुनवाई नहीं है। अफसर और पुलिस भी सिर्फ एमएलए और सांसद की सुनते हैं। ऐसे अफसरों को बदला जाए तो एससी कमरे में बैठकर सैलरी लेते हैं। इनकी जगह काबिल अफसरों को लगाया जाए।

पीडब्ल्यूडी का नहीं पार्षद निगम का विरोध करें, क्योंकि मेयर, एमएलए सब उनके हैं

कांग्रेस पार्षद द्वारा लगाए गए धरने पर इलाका के अकाली दल के पूर्व पार्षद बलबीर सिंह ढिल्लों ने कहा है कि इन पार्षदों को पीडब्ल्यूडी की बजाय अपने एमएलए और पंजाब सरकार मुर्दाबाद के नारे लगाना चाहिए। पैचवर्क के 9.50 लाख का एस्टीमेट बनाकर कोई फंड विभाग को नहीं मिला तो क्या अफसर अपनी जेब से सड़क बनाएंगे।  खासकर जब ढिलवां रोड निगम के हद में है, तो पैचवर्क कराने के लिए पीडब्ल्यूडी के खिलाफ धरना की बजाय पार्षदों को निगम के खिलाफ धरना देना चाहिए था, जहां उनकी ही पार्टी के मेयर और एमएलए हैं। पूर्व पार्षद ने आरोप लगाया कि पार्षद मंदीप जस्सल ने कर्फ्यू के दौरान अवैध निर्माण और काॅलोनी बनने के खिलाफ धरना क्यों नहीं लगाया।

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