नेल्सन मंडेला को हुई 27 साल की कैद जैसा लगा 14 दिन का आइसोलेशनः सतपाल महाराज


न्यूज़ 18 को दिए इंटरव्यू के दौरा सतपाल महाराज कई बार भावुक भी नज़र आए.

न्यूज़ 18 को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में सतपाल महाराज ने दून अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठाए

देहरादून. कोरोना संक्रमित होने के बाद करीब एक महीने तक पहले आइसोलेशन और फिर होम क्वारंटीन में रहे पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने अब कामकाज शुरु कर दिया है. स्वस्थ होने के बाद न्यूज 18 को दिए अपने पहले इंटरव्यू में सतपाल महाराज ने आपबीती बताई. उन्होंने कहा कि संक्रमित होने के बाद जब वे एम्स में भर्ती हुए तो उन्होंने सबसे पहले नेल्सन मंडेला को याद किया जो 27 साल एक कैदी के तौर पर द्वीप में रहे. सतपाल महाराज ने कोविड-19 मरीज़ों के साथ किए जा रहे बर्ताव को भी बदलने का सुझाव दिया और अस्पतालों की हालत और ट्रीटमेंट को लेकर चौंकाने वाली बात कह दी.

कटु अनुभव

बता दें कि उत्तराखंड सरकार में पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज, उनके पुत्र, पुत्र वधु, नाती समेत उनके 22 सहयोगी 30 मई को कोरोना संक्रमित पाए गए थे. इससे पहले उनकी पत्नी अमृता रावत कोरोना पॉज़िटिव पाई गई थी.सतपाल महाराज और उनके परिवार के सदस्यों को ऋषिकेश एम्स में भर्ती करा दिया गया था, जबकि उनके सहयोगियों को दून हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था.

न्यूज़ 18 को दिए एक्सक्लुसिव इंटरव्यू के दौरा सतपाल महाराज कई बार भावुक भी नज़र आए. उन्होंने कहा, “एसिम्प्टमैटिक होने के बावजूद मैंने 14 दिन एम्स में काटे और फिर 17 दिन होम क्वारंटीन रहा. नियमों का पूरी तरह पालन किया लेकिन स्टाफ  को कई कटु अनुभवों से गुजरना पड़ा.”सतपाल महाराज ने कहा कि उनके स्टाफ  में एक व्यक्ति की गाय थी, जिसका दूध बेचकर वह आजीविका चलाता था. वह पॉज़िटिव भी नहीं था. बावजूद इसके लोगों ने उससे दूध लेना बंद कर दिया. नतीजा उसे गाय बेचने को मजबूर होना पड़ा. उन्होंने कहा कि कोरोना से संक्रमित होना कोई अपराध नहीं है, लोगों को चाहिए कि वे ऐसे समय में पीड़ित का साथ दें, उसे भावनात्मक सपोर्ट दें.

पीएम को लिखेंगे पत्र

सतपाल महाराज ने कहा कि एसिम्प्टमैटिक होने के बावजूद उनके नाती को हॉस्पिटल के एक कमरे में रहना पड़ा. चार साल का कोई बच्चा एक कमरे में कैसे बंद रहा होगा, यह सोचने की बात है. उन्होंने कहा कि इसलिए मानवीय पक्ष भी देखा जाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री को पत्र लिखेंगे कि लोग कोरोना से डरें नहीं, कोरोना संक्रमित को अपराधी की तरह ट्रीट न करें. इसके लिए छोटे-छोटे पॉजीटिव संदेश देते वीडियो बनाए जाएं ताकि लोगों में जागरूकता आ सके.

दून अस्पताल में गलत ट्रीटमेंट

महाराज ने देहरादून राजधानी के सबसे बड़े दून हॉस्पिटल की व्यवस्थाओं पर भी सवाल खडे़ किए. उन्होंने कहा कि दून हॉस्पिटल में उनके स्टाफ के लोग भर्ती रहे. स्टाफ ने बताया कि दून हॉस्पिटल में शौचालयों में दरवाजे तक नहीं है. जब एक शौचालय जाएगा तो शौचालय में रहने तक वो गाना गाता रहेगा, ताकि शैाचालय को खाली समझ कोई दूसरा न आ जाए.

उन्होंने हॉस्पिटल की खाने की व्यवस्था पर तो सवाल खड़े किए ही ट्रीटमेंट को लेकर भी ऐतराज़ जताया. कैबिनेट मंत्री ने कहा कि हॉस्पिटल में भर्ती स्टाफ को मलेरिया की दवाई दे दी गई. इससे उन लोगों को बुखार आ गया. महाराज ने कहा कि वे अस्पताल प्रशासन से पूछेंगे कि आखिर मलेरिया की दवाई देने का औचित्य क्या है?

उन्होंने कहा कि अस्पतालों में सुविधाओं बेहतर की जानी चाहिएं. कहीं ऐसा न हो कि अस्पताल में भर्ती होना लोगों को प्रताड़ित होने जैसा लगे. सतपाल महाराज ने कहा कि वे सीएम से भी आग्रह करेंगे कि वे इस ओर ज़रूर ध्यान दें.

First published: July 3, 2020, 6:19 PM IST





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