फिर काग़ज़ों में पौधरोपण की तैयारी! वन विभाग के पास कोई रिकॉर्ड नहीं कि कहां गए अब तक लगाए करोड़ों पौधे


पौधरोपण करते वन मंत्री हरक सिंह रावत. (फ़ाइल फ़ोटो)

एक सीनियर IFS कहते हैं कि यह सब आंकड़ेबाजी का खेल है. अगर धरातल पर जांच कराई गई तो कई अफ़सर नप जाएंगे.

देहरादून. उत्तराखंड में प्रकृति को हरा-भरा बनाने वाला और प्रकृति को धन्यवाद देने का पर्व हरेला बुधवार से शुरू हो गया. उत्तराखंड में लोक संस्कृति से जुड़े इस त्‍योहार में लोग सुख समृद्धि के लिए घरों में हरियाली लगाते हैं. पिछले कुछ सालों से इस पर्व को सरकार ने भी अपना लिया है और हरेला के मौके पर पूरे प्रदेश में महीने भर तक प्लांटेशन किया जाता है. इस बार भी एक जुलाई से 30 जुलाई तक वृहद पौधरोपण किया जाना है. ऐसा सालों से हो रहा है, लेकिन उत्तराखंड की धरती पर अब तक लगाए गए करोड़ों पौधे कहीं दिखते नहीं हैं.

वन विभाग के अनुसार इस बार पूरे साल में पौने दो करोड़ से भी ज़्यादा पौधे रोपे जाएंगे. इस साल वन विभाग 1.09 करोड़ रुपये खर्च कर 1.78 करोड़ पौधे लगा रहा है. वैसे यह हर साल की बात है. वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार 2019-20 में एक करोड़ 37 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य था, लेकिन लगाए गए दो करोड़ पौधे. इसी तरह साल 2018-19 में 1.64 करोड़ के लक्ष्य के विपरीत 1.89 करोड़ पौधरोपण का दावा किया गया है.

पिछले 20 सालों में इसी तरह करोड़ों की संख्या में पेड़ लगाने का दावा वन विभाग करता रहा है, लेकिन फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की ताजा रिपोर्ट के अध्ययन से वन विभाग के इस दावे पर सवाल खड़े होते हैं. रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड में 2017 से लेकर 2019 तक मात्र 0.03 फीसदी फॉरेस्ट कवर बढ़ा है. यह मामूली बढ़ोत्तरी भी नए पौधरोपण यानी नए क्षेत्रों में नहीं हुई है, बल्कि डेंस फॉरेस्ट में ग्रेाथ के कारण यह कवर बढ़ा है.

कोई आंकड़ा नहींं सवाल उठता है कि इतने बडे पैमाने पर हर साल पौधे रोपे जाते हैं तो ये जाते कहां हैं? क्या सच में इतने पौधे लगते हैं या सिर्फ फाइलों में लगा दिए जाते हैं? इनमें से कितने पौधे पनप पाते इसके लिए वन विभाग ने अनुश्रवण एवं मूल्यांकन सेल बनाया है, जिसको चीफ कंनजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट हेड करता है. लेकिन इस सेल के पास ऐसा कोई डेटा ही नहीं है कि बीते सालों में कितनी पौध लगाई गई और इनमें से कितनी जीवित रही.

इस बारे में सवाल पूछने पर अधिकारी एक-दूसरे पर ज़िम्मेदारी टालते नज़र आए. इस सेल को हेड कर रहे आईएफएस नरेश कुमार का कहना है कि वे हाल ही में इस पद पर आए हैं, इसलिए कुछ नहीं बता सकते. हर साल पौधरोपण की इसकी प्लानिंग करने वाला नियोजन विभाग भी सवाल के जवाब में अनुश्रवण एवं मूल्यांकन सेल की ओर इशारा कर देता है.

वन विभाग के पास नहीं मुकम्‍मल रिकॉर्ड
कुल मिलाकर वन विभाग के पास बात का कोई रिकॉर्ड नहीं है कि बीते सालों में उसने जो करोड़ों पौधे लगाने का दावा किया है या प्लांटेशन के नाम पर जो करोड़ों रुपये दफ़न किए गए हैं, उनका आधार क्या है. करोड़ों की संख्या में लगाए गए पौधों में से बरसात में लाखों भी नहीं बचे? बड़े पैमाने पर होने वाले पौधरोपण के बूते अब तक कितना जंगल विकसित हो चुका है? नाम न छापने की शर्त पर एक सीनियर आईएफ़एस अफ़सर कहते हैं कि हकीकत तो यह है कि यह सब गोलमाल है, सब आंकड़ों का खेल है. अगर धरातल पर जांच कराई गई तो कई अफ़सर नप जाएंगे.

First published: July 2, 2020, 6:00 AM IST





Source link

admin

Recent Posts

नाराज माननीयों को मनाने के लिए शिवराज सरकार ने लिया ये फैसला

सीएम शिवराज ने कोरोना संक्रमण को देखते हुए मंत्रियों को योजनाओं के वर्चुअल शिलान्यास-उद्घाटन के निर्देश दिये हैं. (फाइल फोटो)…

14 mins ago

Himachal : 26 सौ SMC शिक्षकों की नियुक्ति रद्द, हाईकोर्ट ने सरकार से कहा – नई बहाली करें

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकार को नई नियुक्तियां करने को कहा है. हिमाचल प्रदेश सरकार (Himachal Pradesh Government) को 26…

56 mins ago

Rajasthan : सहकारी भूमि विकास बैंकों से जुड़े डिफॉल्टर किसानों का 50 प्रतिशत ब्याज माफ

सहकारिता मंत्री ने किसानों के लिए ऋण माफी की घोषणा की. (प्रतीकात्मक फोटो) योजना (Plan) का लाभ लेने वाले किसानों…

2 hours ago

जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों की गोलीबारी में दो पुलिसकर्मी शहीद

डिसक्लेमर:यह आर्टिकल एजेंसी फीड से ऑटो-अपलोड हुआ है। इसे नवभारतटाइम्स.कॉम की टीम ने एडिट नहीं किया है।भाषा | Updated: 15…

3 hours ago

झंडोतोलन के लिए मोरहाबादी मैदान तैयार, आज सुबह 9 बजे तिरंगा फहराएंगे CM हेमंत सोरेन

रांची/रवि सिन्हावैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण काल के बीच 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस समारोह को लेकर राज्यभर में सभी आवश्यक…

3 hours ago

Happy Independence Day: 93 साल पुरानी इस कार से जुड़ी हैं महात्मा गांधी की यादें

रांची/रवि सिन्हाआजादी के संघर्ष और महात्मा गांधी के रांची से जुड़ाव की गवाह राजधानी में मौजूद 93 साल पुरानी एक…

5 hours ago

Search News

Subscribe A2znews For News, Jobs & lifestyle

Recent Posts