महाराष्ट्र : गोंदिया में खिला दुर्लभ ब्रम्ह कमल

Edited By Avinash Pandey | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

ब्रम्ह कमल
हाइलाइट्स
  • 14 वर्षों में एक बार खिलता है ब्रम्ह कमल
  • औषधीय गुणों से परिपूर्ण
  • हिमालय में पाया जाता है
  • होती है ब्रम्हा जी की कृपा

गोंदिया

ब्रम्ह कमल को ईश्वरीय कृपा का रूप माना जाता है । इसमें औषधीय गुण भी पाए जाते हैं। यह पुष्प हिमालय में काफी ऊंचाई पर पाया जाता है। दैवीय और औषधीय शक्तियों से पूर्ण ब्रम्ह कमल गोंदिया के एक परिवार में खिला। जिससे इस परिवार में खुशी की लहर है।

परिवार ने शुरू की पूजा-अर्चना

गोंदिया के निवासी दिलीप टांक के घर में ब्रम्ह कमल का पुष्प खिला है। इस दुर्लभ पुष्प के खिलने से टांक के परिवार में खुशी छा गई। परिवार अपने आपको धन्य मान रहा है। पुष्प के खिलने के साथ ही दिलीप के परिवार में पूजा-अर्चना शुरू हो गई। यह फूल चौबीस घंटों में बंद होने लगा। पुष्प के खिलने की जानकारी फैलते ही टांक परिवार के मित्रों का तांता लग गया। लोग इसका दर्शन करके अपने आपको धन्य करने में लगे हुए थे।

ससुराल से लाए थे पौधा

गोंदिया में खिले इस ब्रम्ह कमल के लक्षण पुराणों में उल्लिखित ही पाए गए। यह पुष्प रात आठ बजे से खिलना शुरू हुआ था और चौबीस घंटे में बंद हो गया। दिलीप टांक ने यह पौधा नासिक में स्थित अपनी ससुराल से लाया था। उन्होंने बताया कि करीब चौदह साल बाद इस पर अद्भुत ब्रम्ह कमल प्रकट हुआ है। इस कमल का ऊपरी सिरा जामुनी रंग का है और पंखुड़ियां हरे-पीले रंग थी। ब्रम्ह कमल उत्तराखंड राज्य का राजपुष्प है। बद्रीनाथ तथा केदारनाथ मंदिर में इस पुष्प के अर्पण करने का विशेष महत्व है।

पौराणिक महत्व

इस पुष्प का पौराणिक महत्व है। ऐसी मान्यता है कि सृष्टि के रचयिता ब्रम्हाजी इस पुष्प पर विराजमान होते हैं। इसलिए माना जाता है कि जिसके घर में यह पुष्प खिलता है उस पर ब्रम्हाजी की साक्षात् कृपा रहती है। उस परिवार की इक्षाएं ब्रम्हाजी पूरी करते हैं। शिव महापुराण में भी इसका उल्लेख है कि जब देवों द्वारा सृष्टि की रचना का कार्य ब्रम्हाजी को सौंपा गया तब ब्रम्हाजी की नाभि से ब्रम्ह कमल की उत्पत्ति हुई थी।

महाभारत में भी जिक्र

दूसरी पौराणिक कथा के अनुसार जब पांडव जंगल में वनवास पर थे, तब द्रौपदी भी उनके साथ गईं थीं। द्रौपदी, कौरवों द्वारा हुए अपने अपमान को भूल नहीं पा रही थी, साथ ही वन की यातनाएं भी मानसिक कष्ट प्रदान कर रही थीं। लेकिन जब उन्होंने पानी की लहर में बहते हुए सुनहरे कमल को देखा तो उनके सभी दर्द खुशी में बदल गए। इससे द्रौपदी को अपने अंदर आध्यात्मिक ऊर्जा का अहसास हुआ। द्रौपदी ने अपने पति भीम को इस सुनहरे फूल की खोज के लिए भेजा था। इसी खोज के दौरान भीम की भेंट हनुमान जी से हुई थी।

औषधीय गुणों से युक्त

वैद्यों के अनुसार ब्रह्म कमल की पंखुड़ियों से अमृत की बूंदें टपकती हैं। इससे कैंसर सहित कई खतरनाक बीमारियों का इलाज होता है। यह जुलाई-अगस्त महीने में खिलता है। इस पुष्प के अर्क से ज्वर में शीघ्र राहत मिलती है। इसके अलावां यूरिनरी ट्रैक इन्फेक्शन, पुरानी खांसी, यौन संचारित रोग से भी राहत दिलाता है यह पुष्प।

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