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मानसून सीजन बढ़ाता है ब्रोंकाइटिस का खतरा, बरतें ज्‍यादा सावधानी


ब्रोंकाइटिस में श्वास नली में सूजन आ जाती है. इसमें मरीज को बहुत अधिक खांसी आती है.

प्रदूषित हवा में कई बैक्टीरिया (Bacteria) और वायरस (Virus) पनपने लगते हैं, जिनसे संपर्क होने के कारण संक्रमण (Infection) का खतरा बढ़ जाता है.



  • Last Updated:
    July 31, 2020, 3:10 PM IST

मानसून के मौसम (Monsoon Season) में कई तरह के इंफेक्शन का खतरा होता है. इस मौसम में बादलों के कारण प्रदूषित हवा वातावरण में ही रहती है. इसी प्रदूषित हवा में कई बैक्टीरिया (Bacteria)  और वायरस (Virus) पनपने लगते हैं, जिनसे संपर्क होने के कारण संक्रमण (Infection) का खतरा बढ़ जाता है. बारिश के मौसम में श्वसन संबंधी दिक्कतें अधिक होती हैं जैसे- सर्दी खांसी, निमोनिया, एलर्जी, अस्थमा. इन्हीं में से एक है ब्रोंकाइटिस बीमारी (Bronchitis Disease), जिस पर अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया जाए तो घातक रूप ले सकती है. आइए जानते हैं ब्रोंकाइटिस की बीमारी के बारे में-

ये है ब्रोंकाइटिस बीमारी
myUpchar से जुड़े एम्स के डॉ. नबी वली के अनुसार ब्रोंकाइटिस में व्यक्ति की श्वास नली में सूजन आ जाती है. इसमें मरीज को बहुत अधिक खांसी आती है और सामान्य से अधिक बलगम बनता है. श्वास नली कमजोर हो जाती है. अत्यधिक बलगम बनने की वजह से श्वास नली में रुकावट होने के कारण फेफड़े भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने लगते हैं. मरीज को सांस लेने में बहुत अधिक समस्या होने लगती है.ब्रोंकाइटिस के प्रकार और लक्षण

ब्रोंकाइटिस दो प्रकार के होते हैं– एक्यूट ब्रोंकाइटिस और क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस. एक्यूट ब्रोंकाइटिस में मामूली सर्दी-बुखार होता है. इसमें कफ होने के साथ ही सीने में तकलीफ और सांस लेने में परेशानी होती है. एक्यूट ब्रोंकाइटिस में हल्का बुखार भी आता है. एक्यूट ब्रोंकाइटिस बच्चों को ज्यादा होता है. वहीं क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस में खांसी और कफ अधिक होता है और यह ज्यादा समय तक रह सकता है. अगर सही उपचार नहीं कराया जाए तो इसके ठीक होने में कई महीने भी लग सकते हैं. क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस अधिक धूम्रपान करने से भी होता है. इसमें क्षतिग्रस्त हुए फेफड़ों को दोबारा ठीक नहीं किया जा सकता.

ब्रोंकाइटिस से कैसे बचाव करें
ब्रोंकाइटिस से बचने के लिए खानपान पर ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है. आइए जानते हैं कि इस मानसूनी मौसम में किस प्रकार की चीजों का सेवन किया जाना चाहिए.

  • myUpchar से जुड़े डॉ. लक्ष्मीदत्ता शुक्ला के अनुसार अदरक, लहसुन, शहद, निलगिरी का तेल, सेंधा नमक और हल्दी इस बीमारी से छुटकारा पाने का घरेलू इलाज हैं.
  • अपने आहार में ज्यादा से ज्यादा साबुत अनाज और पॉलीअनसैचुरेटेड फैट (अखरोट, बादाम, ट्यूना और साल्मन मछली) वाले खाद्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए.
  • ड्रायफ्रूट्स का अधिक सेवन करें, जिसमें बादाम, अखरोट ज्यादा लें.
  • बारिश के मौसम में काढ़ा, हर्बल चाय और वेजीटेबल सूप लेते रहें.
  • संक्रमण से बचने के लिए एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर चीजें लेते रहना चाहिए. इसके लिए हल्दी, अदरक, लहसुन इन सभी को अपने आहार में शामिल करें.
  • तेल और वसायुक्त खाने से बचें और बाहर का खाने से भी परहेज करें.
  • मानसून के मौसम से कच्चा सलाद खाने से बचना चाहिए. इम्युनिटी बढ़ाने के लिए आंवला और नींबू का सेवन करना चाहिए.
  • हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार इस मौसम में नानवेज खाने से भी परहेज करना चाहिए.

ये भी पढ़ें – प्रेग्नेंसी में सेक्स करना सही या गलत, जरूर जान लें ये खास बातें

ब्रोंकाइटिस के मरीज इस बात का रखें विशेष ध्यान
ब्रोंकाइटिस की बीमारी थोड़ा ध्यान रखने पर अपने आप ठीक हो जाती है, लेकिन अगर सर्दी, खांसी, बुखार, बदन दर्द अधिक समय तक रहे तो डॉक्टर को जरूर दिखाना चाहिए. इसके अतिरिक्त अगर खांसते समय खून निकले या जरूरत से ज्यादा कफ आए और सांस लेने में अधिक तकलीफ हो तो यह क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस के लक्षण हो सकते हैं, इसलिए जल्द ही डॉक्टर से संपर्क कर इसका इलाज करवा लेना चाहिए.

अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, ब्रोंकाइटिस के इलाज में किस तरह मदद कर सकते हैं प्याज, सेंधा नमक, हल्दी, तिल और अदरक-लहसुन पढ़ें।

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