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2 महीने में दोगुनी हुई ऑनलाइन ठगी, जालसाजों ने फेक ऐप और लिंक के जरिए लोगों के अकाउंट खाली किए

दैनिक भास्कर

Jul 03, 2020, 06:25 AM IST

चंडीगढ़. सावधान! अगर आप ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं या ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कर रहे हैं तो सतर्क हो जाइए। आपके हर लेन-देन पर किसी तीसरे की नजर है। क्योंकि, लॉकडाउन के दौरान की गई ऑनलाइन शॉपिंग का फायदा सबसे ज्यादा साइबर ठगों ने उठाया है। पंजाब में पिछले सवा 2 महीने में ही ठगों ने 2700 लोगों से 90 लाख से ज्यादा रुपए उड़ाए हैं। इसमें एटीएम कार्ड क्लोनिंग के मामले भी शामिल हैं।

ठगी मामले में मोहाली आगे है। यहां 2 माह में 293 शिकायतें आई हैं और करीब 27 लाख रुपए ठगे गए हैं। सिर्फ कार्ड क्लोनिंग से ही 23 लाख की ठगी हुई। लुधियाना में 16 से ज्यादा मामलों में साढ़े 8 लाख की ठगी की गई है। वहीं, 10% ऐसे मामले भी हैं, जिनके फोन या कम्प्यूटर हैक कर ब्लैकमेल किया गया। 20% लोगों ने सिर्फ शिकायतें कर छोड़ दीं। इससे पहले हर माह करीब 800 शिकायतें आती थीं। वजह लॉकडाउन के दौरान ज्यादातर नए लोग ऑनलाइन शॉपिंग साइटों पर गए, जो सतर्कता की कमी के कारण ठगों के शिकार हो गए।

ठगी का तरीका बदला: न ओटीपी, न पासवर्ड की जरूरत

हैकरों ने ठगी का तरीका बदल दिया है। उन्हें अब बैंक के ओटीपी, पिन और पासवर्ड की जरूरत नहीं रहती है। अकाउंट नंबर से ही पैसे निकाल लिए जाते हैं। साइबर क्राइम में इसे विशिंग अटैक कहते हैं। इसके लिए हैकरों ने फेक वेबसाइट बनाने के साथ, बैंकों की फेक ऐप, स्कूलों की फीस जमा कराने काे फर्जी ऐप बना रखे हैं। हैकर इसे दिल्ली, यूपी और झारखंड से ऑपरेट करते हैं। 3 केस से समझें, कैसे ठगे लाखों रुपए…

केस-1: शराब की होम डिलीवरी का झांसा दे डेढ़ लाख ठगे

बठिंडा में शातिर ठगों ने शराब की होम डिलीवरी के नाम पर एक व्यक्ति से ठगी की। पीड़ित प्रीतमहिंदर ने बताया कि 11 अप्रैल को किसी ने 9348524907 नंबर से कॉल की और ऑनलाइन शराब मंगवाने और डिस्काउंट का वादा किया। इस पर मैंने शराब मंगवाने का मन बनाया तो उसने कहा, उन्हें सिर्फ खाता नंबर दे दें, जिससे वह प्रक्रिया शुरू कर देगा। खाता नंबर देते ही कुछ समय बाद डेढ़ लाख निकल गए। शिकायत दी पर कुछ नहीं हुआ।

केस-2: फेसबुक पर भर्ती के नाम पर 2 लाख उड़ाए लुधियाना

कूमकलां गांव के मंजीत ने बताया कि उसने फेसबुक पर फौज में भर्ती के लिए एक ऑनलाइन लिंक देखा। बेटे को भर्ती कराने के लिए उस लिंक को खोला और उसमें बैंक डिटेल भरी। थोड़ी देर बाद खाते से 2 लाख उड़ गए। शिकायत पर कुछ नहीं हुआ।

केस-3: क्रेडिट कार्ड के नाम पर खाते से निकाले 2 लाख
पटियाला: लखवीर कौर ने बताया उसने क्रेडिट कार्ड बनवाया था। एक दिन  फोन आया कि उनके बाउचर आए हुए हैं जिन्हें फिल करना है। वाउचर को भरने से और सुविधाएं मिलेंगी। आरोपियों ने कहा उनके फोन पर आने वाले 5 कोड बताने होंगे। ऐसे करने पर खाते से ₹2 लाख 4 हजार निकाल लिए।

सतर्क रहें: शॉपिंग के लिए फर्जी वेबसाइट

1. ठगों ने कई नामी कंपनियों की फेक वेबसाइट बनाईं

इन साइट पर सामान को चूज करने और बाद में बैंक डिटेल भरने के बाद वेबसाइट का पेज ब्लैंक हो जाता है। इसके बाद लोगों को उस कंपनी के नाम फोन कर खरीदे सामान के पैसे एक खाते में डालने को कहा जाता है। पैसे जमा कराने के बाद न तो सामान पहुंचता है और न पैसे वापस मिलते हैं। पर खाता खाली हो जाता है।

2. कोरोना के नाम मैसेज भेज खाते कर रहे खाली
हैकर फोन व ईमेल पर कोरोना की जानकारी देने के लिए मैसेज में एक लिंक भेज रहे हैं। जैसे ही लोग उसे ओपन करते हैं तो फोन व कंप्यूटर हैक कर लिया जाता है। अक्सर लोग ऑनलाइन ट्रांजेक्शन फोन या लैपटाप से करते हैं। इस लिंक पर जाने के बाद बैंक की सारी डिटेल को हैक कर वे खाते खाली कर देते हैं।

3. पुलिस भर्ती के नाम पर भी युवाओं को ठगने की कोशिश
हाल में हैकरों ने पंजाब पुलिस की भर्ती का सोशल मीडिया पर नोटिस चला दिया। इनमें भर्ती के बारे में कहा था। हालांकि, पुलिस ने आरोपियों को पकड़ लिया है। इसमें युवा भर्ती के नाम पर ऑनलाइन फार्म भरने के साथ भर्ती को रखी फीस जमा करवाते तो फीस की राशि के साथ खाते की डिटेल हैकरों के पास आ जाती।

  • ये बरतें सावधानी

गूगल सर्च की बजाय एड्रेस बार में जाकर साइट को ओपन करें

साइबर एक्सपर्ट मनप्रीत ने बतातें हैं कि गूगल के सर्च इंजन पर हैकरों ने हजारों फेक वेबसाइट बनाई होती हैं जोकि बैंकों या निजी कंपनियों जैसी ही होती हैं। लोगों को सर्च इंजन में जाने की बजाय सीधा एड्रेस बार में जाकर वेबसाइट खोलनी चाहिए। इसके अलावा अंजान लिंक और ईमेल को ओपन न करें। जिस खाते से ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करते हैं, उसमें उतने ही पैसे डालें जितनी जरूरत हो।

ऐसे पता करें फेक साइट

  • कंपनियों या बैंकों की असली बेवसाइट खोलने पर ऐड्रस बार में https लिखा होता है, जबकि फेक वेबसाइट पर एड्रेस बार में सिर्फ http लिखा होता है।
  • फेक वेबसाइट में कंपनी के नाम की स्पेलिंग में कुछ एरर होता है।
  • जब भी कोई पर्सनल जानकारी मांगे तो शक करना चाहिए। क्योंकि बैंक या कंपनी ऐसी जानकारी नही मांगती।
  • बैंक द्वारा कभी ओटीपी नंबर नहीं मांगा जाता है।

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