20 जवानों को खोकर चीन पर ‘डिजिटल स्ट्राइक’, मोदी सरकार पर शिवसेना का तीखा तंज

भारत में 59 चीनी ऐप पर प्रतिबंध को लेकर शिवसेना ने केंद्र सरकार पर तंज कसा है। पार्टी ने कहा कि इन ऐप्स के जरिए भारत की जानकारी बाहर जाती थी, इसका पता सरकार को चला लेकिन इसके लिए 20 जवानों को शहीद होना पड़ा।

Edited By Raghavendra Shukla | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

भारत सरकार चीन को देगी एक और बड़ा झटका
हाइलाइट्स
  • चीनी ऐप बैन पर शिवसेना ने मोदी सरकार पर कसा तीखा तंज
  • कहा, 20 जवानों को खोकर सरकार ने किया डिजिटल स्ट्राइक
  • ‘सरकार देर से जागी, इसके पीछे जनता की लगातार मांग है’

मुंबई

टिक-टॉक समेत 59 ऐप्स को बैन कर चीन के खिलाफ भारत की डिजिटल कार्रवाई को लेकर शिवसेना ने केंद्र सरकार पर तंज कसा है। अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में पार्टी ने कहा कि इन ऐप्स के माध्यम से हमारे देश की जानकारी बाहर जाती थी, इसका ज्ञान सत्ताधीशों को हुआ लेकिन इसके लिए सीमा पर हमारे 20 जवानों को शहीद होना पड़ा।

शिवसेना ने कहा कि पाकिस्तान ने जब भारत में घुसकर हमारे सैन्य ठिकानों पर हमला किया था, तब भारतीय सेना ने पीओके में घुसकर हमला किया था। यह हमला सर्जिकल स्ट्राइक के नाम से प्रसिद्ध हुआ। अब जब चीनी सेना गलवान घाटी में घुसी है और हमारे 20 जवान शहीद हुए हैं, तब भारत ने चीन पर ऑनलाइन हमला यानी कि डिजिटल स्ट्राइक कर खलबली मचा दी है।

’20 जवानों को शहीद होना पड़ा’

पार्टी ने कहा कि सरकार ने रक्तरंजित संघर्ष के बदले के रूप में चीनी ऐप्स को बैन कर दिया। उनकी (सरकार की) ओर से कहा गया कि भारत की एकता, संप्रभुता और सुरक्षा की दृष्टि से चीनी ऐप्स खतरनाक हैं, इसलिए इन्हें बैन किया गया है। आखिर, चीनी ऐप्स से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा है यह सरकार को कब समझ आया? हमारे देश की जानकारी का भंडार बाहर जाता है, इसका ज्ञान हमारे सत्ताधीशों को हुआ और इसके लिए लद्दाख की सीमा पर 20 जवानों को शहीद होना पड़ा।

भारत के साथ चीन के जंग से हालात!

  • भारत के साथ लद्दाख में एलएसी पर 15 जुलाई के बाद से ही तनाव चरम पर है। गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हुई झड़प और ड्रैगन के विश्वासघाती रवैये को देखते हुए भारत कोई रिस्क नहीं लेना चाहता। इस कारण न केवल सीमा पर जवानों की तैनाती बढ़ा दी गई है। बल्कि, हिंद महासागर में भारतीय नौसेना ने पेट्रोलिंग तेज की है। चीन के जल, थल और नभ में किए गए किसी भी हिमाकत का जवाब देने के लिए भारतीय सशस्त्र बल पूरी तरह तैयार हैं।

  • चीन गलवान और गोगरा हॉट स्प्रिंग इलाके से फौज हटाने के लिए तो तैयार हो गया है, लेकिन पैंगोंग त्सो झील इलाके में उसके इरादे अब भी नेक नहीं लग रहे हैं। पैंगोंग झील इलाके को लेकर जो टकराव है उस पर अभी स्थिति साफ होती नहीं दिख रही है। यहां पर पीएलए (चीनी) सैनिकों ने बड़ी संख्या में बंकर बना लिए हैं और इस इलाके की किलेबंदी सी कर दी है। उसके सैनिकों ने फिंगर- 4 से 8 तक अपना कब्जा जमाने के बाद यहां सबसे ऊंची चोटी पर भी अपना कब्जा जमाया हुआ है। माना जा रहा है कि यह तनाव अभी कई महीनों तक चल सकता है।

  • जापान के साथ भी चीन पूर्वी चीन सागर में द्वीपों के स्वामित्व को लेकर उलझा हुआ है। दोनों देश इन निर्जन द्वीपों पर अपना दावा करते हैं। जिन्हें जापान में सेनकाकु और चीन में डियाओस के नाम से जाना जाता है। इन द्वीपों का प्रशासन 1972 से जापान के हाथों में है। हाल में ही जापान ने चीनी सेना की एक पनडुब्बी और एक स्ट्रैटजिक बॉम्बर एयरक्राफ्ट को अपनी सीमा से बाहर भगााया था।

  • चीन से खतरे को देखते हुए जापान ने न केवल पूर्वी चीन सागर और प्रशांत महासागर बल्कि हिंद महासागर में भी अपनी ऑपरेशनल गतिविधियों को बढ़ाया है। जापानी की नौसेना भारत के साथ मिलकर युद्धाभ्यास कर रही हैं। इसका मकसद न केवल आपसी तालमेल को बढ़ाना है बल्कि हिंद महासागर से चीन को अलग-थलग करना भी है। वहीं, इसमें भारत और जापान का अमेरिका खुलकर साथ दे रहा है।

  • चीन और ऑस्ट्रेलिया के बीच जारी विवाद अब और गहराता दिखाई दे रहा है। चीनी सरकार की ओर से लगातार किए जा रहे आर्थिक घेराबंदी और साइबर हमलों से परेशान ऑस्ट्रेलिया ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी सेना को और मजबूत करने का फैसला किया है। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिशन ने सेना के लिए नए हथियारों के खरीद की भी घोषणा की है। इसके अलावा एशिया प्रशांत क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया कई महत्वपूर्ण क्षेत्र में अपनी सेना की तैनाती बढ़ाएगा।

  • पीएम मॉरिशन ने बुधवार को घोषणा करते हुए कहा कि ऑस्ट्रेलिया अपने सुपर हॉर्नेट फाइटर जेट्स के बेड़े को मजबूत करने के लिए लंबी दूरी के एंटी शिप मिसाइलों की खरीद सहित देश की रक्षा रणनीति में बदलाव किया जाएगा। ऑस्ट्रेलिया ने ऐसा कदम मित्र देशों, सहयोगियों और मुख्य भूमि की रक्षा के लिए उठाया है। ऑस्ट्रेलिया इस जमीन से लॉन्च की जा सकने वाली लॉन्ग रेंज सरफेस टू सरफेस मिसाइल और सरफेस टू एयर मिसाइल के खरीद के बारे में भी विचार कर रहा है। इसके अलावा हाइपरसोनिक मिसाइलों के खरीद को लेकर भी अमेरिका से बात करने की तैयारी है।

  • चीन के खिलाफ अमेरिका एशिया में अपनी फौज को बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। चीन के आक्रामक रवैये की आलोचना करते हुए यूएस कहा कि हम भारत और अपने मित्र देशों को चीन से खतरे के मद्देनजर अपने सैनिकों की तैनाती की समीक्षा कर रहे हैं। चीन को सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए अमेरिका ने कहा कि जरूरत पड़ी तो अमेरिकी सेना चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी से मुकाबला करने को तैयार है।

  • अमेरिका के पास दुनिया की सबसे आधुनिक सेना और हथियार हैं। दुनियाभर के देशों की सैन्य ताकत का आंकलन करने वाली ग्लोबल फायर पॉवर इंडेक्स के अनुसार 137 देशों की सूची में आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के मामले में अमेरिका दुनिया के बाकी देशों से बहुत आगे है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, अमेरिका के दुनिया में 800 सैन्य ठिकाने हैं। इनमें 100 से ज्यादा खाड़ी देशों में हैं। जहां 60 से 70 हजार जवान तैनात हैं।

  • एशिया में चीन की विस्तारवादी नीतियों से भारत को सबसे ज्यादा खतरा है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण लद्दाख में चीनी फौज के जमावड़े से मिल रहा है। इसके अलावा चीन और जापान में भी पूर्वी चीन सागर में स्थित द्वीपों को लेकर तनाव चरम पर है। हाल में ही जापान ने एक चीनी पनडुब्बी को अपने जलक्षेत्र से खदेड़ा था। चीन कई बार ताइवान पर भी खुलेआम सेना के प्रयोग की धमकी दे चुका है। इन दिनों चीनी फाइटर जेट्स ने भी कई बार ताइवान के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया है। वहीं चीन का फिलीपींस, मलेशिया, इंडोनेशिया के साथ भी विवाद है।

सिर्फ ऐप बैन से नहीं टूटेगी चीन की कमर

शिवसेना ने कहा कि चीन की अर्थव्यवस्था को झटका देना आवश्यक था लेकिन सिर्फ ऐप पर बैन लगा देने से उसकी कमर नहीं टूटेगी। भारत में चीन की हुवेई कंपनी को 5जी नेटवर्क शुरू करने का कॉन्ट्रैक्ट मिला है। ऐसे में हिंदुस्तान की डिजिटल अर्थव्यवस्था की चाभी दूसरे देश के हाथ में होना मतलब हिंदुस्तानी अर्थव्यवस्था के भविष्य की मालकियत चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के हाथ में होने के जैसा है। यह भविष्य में देश के लिए सबसे ज्यादा घातक होने वाला है। सरकार यह क्यों नहीं समझ रही है?

यह भी पढ़ेंः ऐप बैन के बाद भारत ने अब चीन की सबसे दुखती रग को छेड़ा

शिवसेना ने टिक-टॉक बैन पर कहा कि ऐसे चीन ऐप देश में अश्लीलता और दकियानूसी बातों को बढ़ावा दे रहे थे। इससे कई टिक-टॉक स्टार्स पैदा हो गए थे। इनमें से कई ने बीजेपी में प्रवेश किया था। अब सवाल है कि राजनीति में घुसे चीनी टिक-टॉक स्टार्स का क्या होगा?

ब्रिटिस शासन समाप्त होने की 23 बरसी पर विरोध प्रदर्शन

  • रिपोर्ट के अनुसार, हॉन्ग कॉन्ग की सड़कों पर ब्रिटिश शासन समाप्त होने और चीन के कब्जे में आने के 23वीं सालगिरह पर स्थानीय लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ताओं ने विरोध रैली निकाली थी। जिसके बाद चीन समर्थक पुलिस ने न केवल आंदोलनकारी जनता बल्कि वहां मौजूद मीडियाकर्मियों को भी निशाना बनाया। इस दौरान मची भगदड़ की चपेट में आने से कई लोग घायल भी हो गए।

  • गिरफ्तार किए गए पहले शख्स को चीन के नए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत सजा दी जाएगी। इस कानून के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने, विदेशी ताकतों के साथ अलगाव, तोड़फोड़, आतंकवाद के दोषी व्यक्ति को अधिकतम उम्रकैद की सजा सुनाई जा सकती है। चीन के नेशनल पीपुल्स कांग्रेस स्टैंडिंग कमेटी के 162 सदस्यों ने 30 जून को कानून को पेश किए जाने के 15 मिनट के अंदर सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी थी।

  • पेइचिंग हॉन्ग-कॉन्ग की राजनीतिक उठापटक को अपने हाथ में लेने की कोशिश कर रहा है। बता दें कि हॉन्ग-कॉन्ग ब्रिटिश शासन से चीन के हाथ 1997 में ‘एक देश, दो व्यवस्था’ के तहत आया और उसे खुद के भी कुछ अधिकार मिले हैं। इसमें अलग न्यायपालिका और नागरिकों के लिए आजादी के अधिकार शामिल हैं। यह व्यवस्था 2047 तक के लिए है।

  • 1942 में हुए प्रथम अफीम युद्ध में चीन को हराकर ब्रिटिश सेना ने पहली बार हॉन्ग कॉन्ग पर कब्जा जमा लिया था। बाद में हुए दूसरे अफीम युद्ध में चीन को ब्रिटेन के हाथों और हार का सामना करना पड़ा। इस क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए 1898 में ब्रिटेन ने चीन से कुछ अतिरिक्त इलाकों को 99 साल की लीज पर लिया था। ब्रिटिश शासन में हॉन्ग कॉन्ग ने तेजी से प्रगति की।

  • 1982 में ब्रिटेन ने हॉन्ग कॉन्ग को चीन को सौंपने की कार्रवाई शुरू कर दी जो 1997 में जाकर पूरी हुई। चीन ने एक देश दो व्यवस्था के तहत हॉन्ग कॉन्ग को स्वायत्तता देने का वादा किया था। चीन ने कहा था कि हॉन्ग कॉन्ग को अगले 50 सालों तक विदेश और रक्षा मामलों को छोड़कर सभी तरह की आजादी हासिल होगी। बाद में चीन ने एक समझौते के तहत इसे विशेष प्रशासनिक क्षेत्र बना दिया।

‘जो हुआ सो हुआ’

शिवसेना ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में सरकार डिजिटल रूप से जागी है, यह जारी रहना चाहिए। चीनी कंपनियों को अपना डेटा चीनी सरकार को देना बंधनकारक है। ऐसे में चीनी गुप्तचर एजेंसियां और चीनी सेना भारत के इस डेटा का इस्तेमाल हमारे खिलाफ कर सकती हैं। पार्टी ने कहा कि अब जो हुआ सो हुआ। सरकार अब जाग गई है और इसके पीछे जनता की लगातार मांग है।

चीनी ऐप बैन पर शिवसेना ने कसा तंज

Web Title shivsena taunts modi government in samna on 59 chinese app ban(Hindi News from Navbharat Times , TIL Network)

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