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Doctors Day 2020: जोखिम में जान फिर भी सेवा में जुटे हैं ये ‘भगवान’, फ्रंटलाइन कोरोना वॉरियर्स को सलाम


नई दिल्ली. देश में हर साल की तरह इस साल भी नेशनल डॉक्टर्स-डे (National Doctor’s Day) मनाया जा रहा है. इस साल डॉक्टर्स-डे (Doctor’s Day) इसलिए भी खास है कि देश में कोरोना महामारी (Coronavirus Pandemic) के खिलाफ ये डॉक्टर्स फ्रंटलाइन कोरोना वॉरियर्स हैं. डॉक्टर्स इस समय जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे लोगों का न केवल इलाज कर रहे हैं, बल्कि उन लोगों को नया जीवन भी दे रहे हैं. देश में इस समय धरती पर ‘भगवान’ का दर्जा हासिल कर चुके इन डॉक्टर्स की सेवा भावना की हर तरफ तारीफ हो रही है. खुद और अपने परिवार की चिंता छोड़ कर ये डॉक्टर्स दूसरों की सेवा में जी-जान से लगे हुए हैं. न्यूज 18 हिंदी ने इस मौके पर देश के सबसे बड़े अस्पताल एम्स (AIIMS) सहित दिल्ली के सबसे बड़े अस्पताल एलएनजेपी (LNJP) के कुछ कोरोना वॉरियर्स से बात की है.

अपनी जान जोखिम में डाल कर बचाते हैं लोगों की जान
एक जुलाई को भारत में डॉक्टर्स-डे सेलिब्रेट किया जाता है. भारत के महान चिकित्सक और पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री डॉक्टर बिधान चन्द्र रॉय (Dr. Bidhan Chandra Roy) का जन्मदिन और पुण्यतिथि है. डॉ रॉय के सम्मान में हर साल 1 जुलाई को नेशनल डॉक्टर्स डे मनाया जाता है. 1991 में केंद्र सरकार ने इस दिन को नेशनल डॉक्टर्स-डे के तौर पर मनाने का फैसला किया था.

डॉ. गोविंद मखारिया अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली में गेस्ट्रोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर हैं.

क्या कहते हैं देश के सबसे बड़े अस्पतालों के कोरोना वॉरियर्स
दिल्ली स्थित देश के सबसे बड़े अस्पताल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में गैस्ट्रोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डॉ गोविंद मखारिया न्यूज 18 हिंदी के साथ बातचीत में कहते हैं, ’देखिए, इस समय हमलोग कोरोना को लेकर एक लड़ाई लड़ रहे हैं. समाज में कोरोना को लेकर भय का वातावरण है, लेकिन डॉक्टरों में ऐसा नहीं है. हम समाज को आगाह कर रहे हैं कि इससे डरना नहीं लड़ना है. देश के डॉक्टर्स इस आपातकालीन स्थिति के लिए तैयार हैं. डॉक्टर इसको लेकर कभी डरे नहीं. डॉक्टर्स पूरी निष्ठा और चूपचाप तरीके से अपना काम कर रहे हैं. 65 साल से अधिक उम्र के डॉक्टर्स जरूर इससे अलग हैं, लेकिन और जो भी डॉक्टर हैं वह पूरी तरह से समर्पण के साथ इस काम में लगे हुए हैं. कुछ डॉक्टरों की इससे मौत हुई है वह काफी दुखद है. हम भगवान से प्रार्थना करते हैं कि उनके परिवार को शक्ति मिले और वे लोग जल्दी ही इससे उबर जाएं.’

डॉ राकेश गर्ग झज्जर स्थित एम्स (AIIMS) के मेडिकल ऑफिसर और कोरोना के इंचार्ज रह चुके हैं.

झज्जर स्थित एम्स (AIIMS) के मेडिकल ऑफिसर और कोरोना के इंचार्ज रहे प्रोफेसर डॉ राकेश गर्ग न्यूज 18 हिंदी के साथ बातचीत में कहते हैं, ‘देखिए समय तो वाकई बहुत खराब चल रहा है, लेकिन कोरोना से बचने के लिए जो सेफ्टी मेजर्स हैं अगर उसको ठीक से लोग पालन करें तो यह बीमारी ज्यादा नहीं फैलेगी. मास्क का इस्तेमाल करें, सैनिटाइजर का इस्तेमाल कर इस बीमारी से बचा जा सकता है. डॉक्टर्स-डे पर मुझे खुशी होगा कि लोग ये सारे मेजर्स का पालन करें. सभी लोग हेल्थी रहें और सेफ रहें. छोटी-छोटी सावधानियां बरतने से हम बड़े खतरे को खत्म कर सकते हैं. नई बीमारी है तो थोड़ी-बहुत तो परेशानी चलती रहती है. फिलहाल मैं एम्स में लौट आया हूं और यहां के स्टॉफ और लोगों को बता रहा हूं कि किस तरह से इंफेक्शन से बचा जाए. जो डॉक्टर्स या नर्सेज कोविड वार्ड में जाते हैं तो उनको ट्रेंड कर बताते हैं कि आपको कैसे काम करना है. जो फ्रंट लाइन के कोरोना वॉरियर्स हैं उनको हमारी तरफ से बहुत-बहुत शुभकामनाएं कि वह सेफ रहते हुए लोगों की जान बचाएं.’

डॉ सुरेश कुमार एलएनजेपी अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर हैं, जो पिछले दिनों कोरोना से लड़ते-लड़ते खुद भी संक्रमित हो गए थे.

दिल्ली सरकार के सबसे बड़े अस्पताल एलएनजेपी के मेडिकल डायरेक्टर डॉ सुरेश कुमार पिछले दिनों कोरोना से लड़ते-लड़ते खुद भी संक्रमित हो गए थे. डॉ सुरेश कुमार फिर से एक बार उसी जज्बे के साथ अपने कर्तव्य में लगे हुए हैं. न्यूज 18 हिंदी के साथ बातचीत में ड़ॉ सुरेश कुमार कहते हैं, ‘पिछले कुछ दिनों में हमारे बहुत साथी संक्रमित हुए हैं. यह एक कठिन समय है सभी डॉक्टर्स, नर्सेज और अन्य मेडिकल स्टॉफ के लिए. पिछले दिनों जब मैं संक्रमित हुआ था तो मेरे परिवार को बड़ी चिंता होने लगी. मेरी पत्नी बहुत घबरा गई थीं. एक तरह से कोरोना को लेकर जो डर है वह समाज में बहुत ज्यादा है. इससे थोड़ा मनोबल पर फर्क पड़ता है, लेकिन जैसे-जैसे नई-नई टेक्निक आ रही है उससे परसेप्शन में चेंजेज आए हैं. मरीज अब ज्यादा से ज्यादा संख्या में ठीक हो रहे हैं. ऐसा नहीं है कि सौ प्रतिशत फैटल है. भारत में मृत्युदर दूसरे देशों की तुलना में काफी कम है. मानवता की सेवा में अगर कुछ नुकसान भी होता है तो वह हम लेने के लिए तैयार हैं. हमारा कर्तव्य है कि मरीजों की जान बचाना और ज्यादा से ज्यादा मरीज को ठीक करना.’

डॉ. नरेश कुमार दिल्ली में कोरोना के सबसे बड़े अस्पताल एलएनजेपी में पल्मोनरी डिपार्टमेंट के हेड हैं.

कोविड वॉरियर डॉ. नरेश कुमार दिल्ली में कोरोना के सबसे बड़े अस्पताल एलएनजेपी में पल्मोनरी डिपार्टमेंट के हेड हैं. 17 मार्च को एलएनजेपी अस्पताल में कोविड मरीजों का इलाज शुरू हुआ था और अब यह दिल्ली का सबसे बड़ा कोविड का डेडिकेटेड सेंटर बन गया है. तब से डॉ. नरेश कुमार जुड़े हैं. मैनेजमेंट के द्वारा तय किए गए अलग-अलग रोल में अभी भी उसी डेडेकेशन के साथ लगे हुए हैं. डॉ नरेश कुमार कहते हैं, ‘17 मार्च से जब कोविड वार्ड बनाया गया था तभी से हम इसके पार्ट हैं. पहले दिन जो जज्बा था आज भी उसी जज्बे के साथ काम कर रहे हैं. घर-परिवार से दूर जरूर हैं, लेकिन मन में यह विश्वास है कि किसी नेक काम में लगे हुए हैं. पहले थोड़ा डर लगता था, लेकिन अब आदत हो गई. मैनेजमेंट ने जो जिम्मेदारी दी है उस जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा के साथ निभा रहे हैं.’

डॉ. संगीता शर्मा इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर ऐंड एलाइड साइंसेज की प्रोफेसर हैं.

इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर ऐंड एलाइड साइंसेज नई दिल्ली के डॉ. प्रोफेसर संगीता शर्मा कहती हैं, देखिए हमलोग तो अपनी ड्यूटी समझ कर ही मरीजों का इलाज कर रहे हैं. कोविड को लेकर जो समझ है उसके हिसाब से डॉक्टर काम कर रहे हैं. थोड़ी बहुत तो डर है इससे मैं इनकार नहीं कर सकती हूं लेकिन इसके बावजूद डॉक्टर्स पूरी तन्मयता से लगे हुए हैं. टेस्टिंग को लेकर जो प्रक्रिया है वह सभी को फॉलो करना पड़ रहा है. इस बीमारी की अभी समझ उतनी समझ नहीं है इसलिए दिक्कत हो रही है, लेकिन इसके बावजूद डॉक्टर्स लगे हुए हैं. महीनों अपने परिवार से दूर रहना पड़ रहा है. दमघोंटू पीपीई किट पहन कर काम करना पड़ रहा है. इसके बावजूद मरीज का इलाज करना और खुद को इंफेक्शन से बचाना सबसे बड़ी चुनौती है. संक्रमण की वजह से लगातार अस्पताल के स्टाफ के लोग बीमार पड़ते जा रहे हैं, लेकिन जो ड्यूटी पर हैं, वो लगातार डटे हैं.’

ये भी पढ़ें: LG-केजरीवाल ने डॉ. असीम गुप्‍ता को किया सलाम, परिवार को मिलेगी 1 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि

पिछले कई महीनों से कोरोना संक्रमण के खतरे के कारण देश के कई डॉक्टर्स अपने परिवार से अलग रहने को मजबूर हैं. ये कोरोना वॉरियर्स देश को इस संक्रमण से लड़ने में अपना योगदान दे रहे हैं. देशभर में एक हजार से भी ज्यादा डॉक्टर्स, नर्सेज स्टाफ और हेल्थ केयर वर्कर कोरोना संक्रमण के शिकार हो चुके हैं. कई डॉक्टर्स और हेल्थ केयर वर्कर्स कोरोना मरीजों के इलाज करते-करते अपना गंवा चुके हैं, लेकिन देश में फैले कोरोना संक्रमण से लड़ने में आज भी सबसे आगे यही कोरोना वॉरियर्स खड़े हैं. आज के समय में इन्हें भगवान से कुछ भी कम कहना इनका अपमान है.





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